विधानसभा चुनाव में हार-जीत के परिणाम चौंकाने वाले आए। वोटरों ने पार्टियों का दामन थामा तो कहीं प्रत्याशी के चेहरों को देखकर वोट किया। लेकिन, काफी संख्या में ऐसे भी वोटर रहे, जिन पर न मोदी का जादू चला और न ही अखिलेश का विकास मंत्र। 5728 वोटरों ने प्रत्याशियों को सिरे से नकार कर नोटा का बटन दबाया।
विधानसभा चुनाव में भाजपा, सपा, बसपा और रालोद के शीर्ष नेताओं ने खूब भाषण दिए, लेकिन जिले की सीटों पर सीधे रूप में वोटरों पर ध्रुवीकरण हावी रहा। चुनावी परिणाम की जो तस्वीर सामने आई, उसने सबको चौंका दिया। वर्ष 2014 लोकसभा चुनाव से चली मोदी सुनामी विधानसभा में भी बरकरार रही। वहीं, रिजल्ट के आंकड़ों पर गौर करें तो सभी विधानसभाओं में बड़ी संख्या में वोटरों ने प्रत्याशियों को नकारा है।
जनपद की छह विधानसभा सीटों पर 80 प्रत्याशियों ने ताल ठोकी। इनमें मुख्य दलों के साथ निर्दलीय रहे, मगर वोटों की पोटली खुली तो करीब 5728 प्रत्याशियों ने जनपद में एक भी प्रत्याशी को नहीं चुना है। इन वोटरों पर न तो मोदी का असर हुआ और न ही अखिलेश-राहुल का साथ पसंद आया। बहनजी की बातों को भी सिरे से खारिज कर दिया। सबसे अधिक बुढ़ाना सीट पर 1286 वोटरों ने नोटा (इनमें से कोई नहीं) का बटन दबाया है। इसके बाद शहर में भी एक हजार से अधिक लोगों ने नोटा को पसंद किया।
डाक पत्रों से आए 3446 वोट
मुजफ्फरनगर। पांच विधानसभा सीटों पर पोस्टल मतों की संख्या भी 3446 रही। चरथावल में एक भी पोस्टल मत नहीं किया गया है। शहर सीट पर सबसे अधिक 1113 वोट डाक मत आए हैं। दूसरे नंबर पर पुरकाजी में 758, खतौली में 643, मीरापुर में 393 तथा बुढ़ाना में 536 डाक मत पत्र आए हैं। इन पांच विधानसभा में 76 डाकमतों को रिजेक्ट किया गया है।
विधानसभावार पोस्टल मत
मुजफ्फरनगर-----1133
चरथावल-------1016
बुढ़ाना----------1286
मीरापुर----------1090
पुरकाजी---------1139
खतौली----------694