मुजफ्फरनगर के तितावी में वर्ष 2007 में हुई ओलावृष्टि में किसानों की फसलें तबाह हो गई थीं। सरकार ने किसानों को जो आर्थिक सहायता दी, उसे तितावी साधन सहकारी समिति के कारिंदे हजम कर गए। मामले की शिकायत डीएम को व्हाट्सअप ग्रुप से मिली। जिलाधिकारी डीके सिंह ने एआर कोआपरेटिव की अध्यक्षता में तीन अधिकारियों की समिति गठित कर जांच रिपोर्ट तलब की है।
तितावी साधन सहकारी समिति में अमीननगर, लडवा, धनसैनी, बुडीना कलां, नसीरपुर, लखान और तितावी गांव आते हैं। 2007 में हुई ओलावृष्टि में इन गांवों की गेहूं की तैयार फसल नष्ट हो गई थी। ओलावृष्टि इतनी भयानक थी कि सड़क पर तीन फीट की परत जम गई थी। भाकियू ने किसानों को मुआवजा देने को मांग उठाई थी। डीएम ने जांच के बाद दैवीय आपदा से किसानों को मुआवजा दिए जाने की संस्तुति की थी। पैरवी के बाद शासन से मुआवजा स्वीकृत हुआ था ।
कर्जदार किसानों को मिलने वाली राहत राशि को समिति के माध्यम से भेजा गया। किसानों के कर्ज से राहत राशि की रकम कम होनी थी, लेकिन तितावी किसान सेवा समिति के अधिकारियों ने राहत राशि की रकम डकार ली। किसानों को पैसा नहीं मिल पाया। भाकियू के प्रेस प्रवक्ता धर्मेंद्र मलिक ने मामले की शिकायत व्हाट्सअप ग्रुप में की।
डीएम डीके सिंह ने इसका संज्ञान लेते हुए इस घोटाले की जांच के लिए तीन अधिकारियों की एक कमेटी गठित कर दी है। कमेटी में एआर कोआपरेटिव, खंड विकास अधिकारी बघरा, वित्त एवं लेखाधिकारी डीआईओएस कार्यालय को नामित किया गया है। जांच के बाद यह कमेटी अपनी रिपोर्ट डीएम को सौंपेगी।
लाखों में है घोटाला : मलिक
तितावी। भाकियू नेता धर्मेंद्र मलिक का कहना है कि समिति के चेयरमैन ने अपने गांव लडवा के किसानों को तो सरकार से आया पैसा दे दिया। समिति के बाकी गांव के किसी किसान को आर्थिक सहायता नहीं मिली। मामले की जांच में लाखों का घोटाला सामने आ सकता है।
हां, घोटाला हुआ है : सचिव
तितावी। समिति के सचिव भारतवीर ने बताया कि घोटाला उनके समय से पहले का है। उस समय के सचिव मूलचंद शर्मा इसमें शामिल रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि समिति चेयरमैन ऑफिस में बैठकर शराब पीते हैं। उन्होंने शराब पीते हुए कुछ फोटो भी जारी किए।