खतौली में हुए कलिंग उत्कल एक्सप्रेस हादसे की गाज रेलवे बोर्ड अधिकारियों से लेकर सेक्शन इंजीनियरों तक भले ही गिर गई हो, लेकिन अभी भी मामले के नए-नए राज खुलते जा रहे हैं। रेल हादसे से जुड़ा एक और ऑडियो सोमवार को वॉयरल हुआ। 2 मिनट 17 सेकेंड के इस ऑडियो में टपरी और देवबंद आदि स्टेशनों से लेकर खतौली स्टेशन की कंट्रोल रूम कर्मचारियों से बातचीत रिकार्ड है।
ऑडियो में स्टेशन अधीक्षक और पावर केबिन के बीच बातचीत हो रही है। ऑडियो में ट्रेनों की आवाजाही की जानकारी के आदान-प्रदान के बीच एक रेल कर्मी किसी अधिकारी को बता रहा है कि परमानेंट वे इंस्पेक्टर (पीडब्ल्यूआई यानी रेलपथ निरीक्षक) बीस मिनट का ब्लॉक मांग रहा है। साथ ही वह रेल ट्रैफिक ज्यादा होने की मजबूरी बताते हुए ब्लॉक देने से मना भी करता है। इससे आशंका जताई जा रही है कि बगैर इजाजत के ही ट्रैक पर काम हो रहा था। उधर, रेल प्रशासन नए ऑडियो की भी जांच करने की बात कर रहा है।
ऑडियो में बातचीत के लहजे से लग रहा है कि यह खतौली रेलवे स्टेशन के किसी रेल कर्मी व रेलवे कंट्रोल रूम के अधिकारी के बीच की है। इसमें खतौली का रेल कर्मी बताता है कि साहब! पीडब्ल्यूआई बीस मिनट का ब्लॉक मांग रहे हैं। उन्हें कोई ब्लू ज्वाइंट बदलना है। लेकिन इससे मेन लाइन और लूप लाइन दोनों बंद हो जाएगी। जबकि इस समय गाड़ियों का पूरा ग्रुप (रेल ट्रैफिक) है। ऐसी हालत में कैसे ब्लॉक मिल जाएगा। कंट्रोल रूम इस बात से सहमति जताते हुए फोन काट देता है। नए ऑडियो से आशंका जाहिर की जा रही है कि बगैर इजाजत के पीडब्ल्यूआई ने काम शुरू कर दिया। वहीं, इसकी जानकारी भी रेलवे स्टेशन को नहीं दी गई।
आधिकारिक सूत्र बताते हैं कि कई बार ट्रैक पर अचानक काम करने की जरूरत पड़ जाती है। इस दौरान पीडब्ल्यूआई स्टेशन मास्टर को इसकी जानकारी देकर उस वक्त ट्रैक पर काम करता है, जब दो ट्रेनों के गुजरने के बीच का समय लंबा होता है। काम के वक्त पीडब्ल्यूआई न सिर्फ स्टेशन मास्टर के साथ समन्वय बनाए रखता है। बल्कि काम की जगह से करीब 500 मीटर पहले साइट बैनर लगाया जाता है। वहीं, अचानक ट्रेन दिखने की हालत में पटाखों का इंतजाम भी होता है।
जिससे चालक को इसकी सूचना दी जा सके। रविवार को जारी आॅडियो से साफ है कि ऐसा नहीं किया गया, हर स्तर पर लापरवाही बरती गयी। ट्रेन दिखने पर ट्रैक पर काम करने वाले कर्मचारी फरार हो गए। रेल प्रशासन का कहना है कि दोनों ऑडियो की जांच होगी। आवाज का मिलान करने के साथ इसे मौके से मिले साक्ष्यों के साथ जोड़कर देखा जाएगा। जांच के बाद ही कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया दी जाएगी।
लापरवाही के कारण हुआ हादसा: सीआरएस
रेल मंत्री सुरेश प्रभु के निर्देश पर उत्कल हादसे की जांच करने आए रेल संरक्षा आयुक्त (सीआरएस) एसके पाठक ने कहा कि घोर लापरवाही के कारण यह हादसा हुआ, यदि नियमानुसार ब्लॉक लिया होता तो हादसा नहीं होता। जांच की जाएंगी, किस स्तर पर कहां किसने क्या गलती है, कौन कहां कितना दोषी है। एक माह के भीतर वो जांच रिपोर्ट रेल मंत्रालय को सौंपेंगे।
उत्कल हादसे के घटनास्थल का निरीक्षण करने के बाद खतौली रेलवे स्टेशन पर पत्रकारों के सवालों के जवाब में पाठक ने कहा कि वो जांच के बारे में कुछ नहीं बता सकते। पत्रकारों के बार-बार पूछने पर उन्होंने कहा कि लापरवाही के कारण हादसा हुआ है। कर्मचारियों को नियमानुसार ब्लॉक लेना चाहिए था, यदि ब्लॉक लिया होता तो यह हादसा नहीं होता। ट्रैक पर काम करने वाले कर्मचारियों, अधिकारियों, स्टेशन मास्टर, जेई आदि से पूछताछ की जाएगी।
इसके बाद ही क्लियर होगा, कहां किस स्तर पर गलती हुई और कौन कितना दोषी है। नियमानुसार क्रैक ट्रैक को ठीक करने के लिए ब्लॉक लेकर काम करना होता है, यहां क्यों नहीं ब्लॉक मिला, इसकी भी जांच की जाएगी। यदि किसी भी व्यक्ति के पास दुर्घटना के संबंध में कोई जानकारी हो तो वह उन्हें व्यक्तिगत रूप से या उनके कार्यालय के पते पर लिखित में उपलब्ध करा सकता है। रेल हादसों की रोकथाम के उपाय करने के बारे में कहा कि वह सुरक्षा संबंधित अपने सुझाव रेल मंत्रालय को भेजते हैं, उन्हें रेल मंत्रालय की ओर से लागू किया जाता है।