स्पिक मैके के तत्वावधान में एसएफडीएवी मंसूरपुर में केरल की कला कलारीपयट्टू के हैरतअंगेज करतब देखकर दर्शक दंग रह गए। गजब की फुर्ती, कमाल की शारीरिक सिद्धियां और युद्ध कला का विलक्षण कौशल दर्शकों के लिए बेहद रोमांचकारी अनुभव रहा। कलाकारों के दस सदस्यीय दल में जर्मनी की सलमा ने भी खूब तालियां बटोरी।
देश की अग्रणी सांस्कृतिक संस्था स्पिक मैके के कार्यक्रम में केरल के इन कलाकारों ने देश की विरासत की अनूठी झलक पेश की। शास्त्रीय संगीत एवं नृत्य से अलग केरल की हजारों साल पुरानी युद्धकला कलारीपयट्टु को देख दर्शक हैरत में पड़ गए।
लपलपाती तलवारें, खनकती ढालें, भालें, कटारें और युद्धकला के रोमांचकारी पैंतरे, दांवपेंच से कुछ ऐसा माहौल रच गए कि दर्शक सुध-बुध खो बैठे। वल्लभ भट्ट कलारी दल का नेतृत्व कर रहे कृष्णा दास ने कई प्रस्तुतियां दी।
पारंपरिक प्रणाम के बाद ढाल तलवार, भाला छोटी-बड़ी लाठी, कटार और युद्ध की अन्य विधियों का सुंदर कोलाज प्रस्तुत किया। जिस कला को हम देशी, विदेशी फिल्मों में देखते हैं उसे साक्षात पाकर बेहद रोमांचित हुए। इससे पूर्व, दीप प्रज्वलन प्रधानाचार्य पूनम चौधरी ने किया। मौके पर संयोजक आरएम तिवारी, एनएन पंत, मृदुला मित्तल, नीलू जैन, विपिन जैन, मनोज अरोरा, राहुल सेन, गोविंद, अभिनव, सागर, यश, रक्षा का सहयोग रहा।