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पॉलिथीन और कूड़ा खाने को मजबूर गोवंश

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मंडी में गोवंश रखने के लिए की गई अस्थायी व्यवस्था। - फोटो : MUZAFFARNAGAR
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पॉलिथीन और कूड़ा खाने को मजबूर गोवंश
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मुजफ्फरनगर। गोवंश सुरक्षा और आश्रय को लेकर प्रशासन के दावों का दम निकलता जा रहा है। शहर और गांवों में आश्रय स्थल एवं गोशाला संचालन के बावजूद शहर में सैकड़ों गोवंश निराश्रित घूम रहे हैं। ये दिन भर कूड़े के ढेरों पर पॉलिथीन और अन्य कचरा खाने को मजबूर हैं। मंडी में बने अस्थायी गौआश्रय स्थल में गोवंश को रखने के नाम पर खानापूर्ति हो रही है।
प्रदेश सरकार के आदेश के बावजूद निराश्रित गोवंश संरक्षण की ओर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा। नगर में सैकड़ों की तादाद में निराश्रित गोवंश घूम रहे हैं। ये डलावघरों में भोजन की तलाश में कचरा एवं पॉलिथीन खाते रहते हैं। कुछ समय पूर्व नई मंडी में अस्थायी आश्रय स्थल की शुरुआत की गई थी। दस दिन पूर्व ही प्रमुख सचिव कृषि अमित मोहन प्रसाद जिले के दौरे पर आए, तब मंडी में बने आश्रय स्थल में 100 से ज्यादा गोवंश थे, लेकिन अब वहां 20-25 गोवंश ही मौजूद हैं। दरअसल, आश्रय स्थल पर पशुओं की देखभाल के लिए कोई कर्मचारी नियमित रूप से तैनात नहीं रहता। मंडी में आसपास के दुकानदारों ने बताया कि सुबह कुछ लोग चारा डाल जाते हैं, जिसे खाने के लिए कुछ गोवंश आ जाते हैं। इसके बाद न कर्मचारी दिखाई देते हैं और ज्यादातर गोवंश भी इधर-उधर चले जाते हैं।
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चार दिन में पकड़े 74 गोवंश
मुजफ्फरनगर। नगर पालिका के अधिकारियों ने शहर में निराश्रित घूम रहे गोवंश को पकड़वाने के लिए चार दिन अभियान चलाया। इस दौरान 74 गोवंश पकड़े गए, लेकिन इन्हें मंडी के अस्थायी आश्रय स्थल में नहीं रखा गया, बल्कि पुरकाजी, खतौली और बुढ़ाना के कान्हा पशु आश्रय स्थलों में भिजवा दिया गया। इसके बावजूद बड़ी तादाद में गोवंश निराश्रित घूम रहे हैं।
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जमीन के अभाव में नहीं बना कान्हा पशु आश्रय स्थल
मुजफ्फरनगर। नगर पालिका मुजफ्फरनगर में कान्हा पशु आश्रय स्थल बनाने के लिए 3.23 करोड़ रुपये 2016 में जारी किए गए थे। अब तक नगर पालिका आश्रय स्थल का निर्माण नहीं करा पाई। नगर पालिका ईओ विनय कुमार मणि त्रिपाठी का कहना है कि जमीन नहीं मिल पाने के कारण आश्रय स्थल का निर्माण नहीं हो सका है। निर्माण के लिए जमीन की तलाश की जा रही है।
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