मुजफ्फरनगर/लखनऊ। राज्य सरकार ने बृहस्पतिवार को जानसठ तहसील के एसडीएम जयेंद्र सिंह को निलंबित कर दिया। उनपर 750 बीघा सरकारी जमीन को घूस लेकर सोसाइटी के नाम करने के मामले में कार्रवाई की गई है।
इसकी शिकायत भाजपा के पूर्व विधायक विक्रम सैनी ने की थी। डीएम ने डेरावाल कॉपरेटिव फार्मिंग सोसायटी की जमीन को रातों-रात निजी नामों में दर्ज किए जाने की तीन सदस्यीय कमेटी से जांच कराई थी, जिसमें प्रथम दृष्टया अनियमितताएं अंजाम दिए जाने की पुष्टि होने पर शासन को जांच रिपोर्ट भेजकर कार्रवाई की संस्तुति की थी।
जानसठ तहसील के इशहाकवाला गांव में स्थित सरकारी जमीन पर वर्ष 1962 में डेरावाल कॉर्पोरेटिव फार्मिंग सोसायटी की स्थापना की गई थी। सोसायटी के पास करीब 900 बीघा जमीन थी। इस जमीन को लेकर लंबे समय से जारी विवाद के बावजूद एसडीएम ने सुनवाई फिर से शुरू कर दी और बीती 19 जुलाई को अचानक आदेश जारी कर 600 बीघा सोसायटी की और 150 बीघा सरकारी जमीन हरबंस नामक किसान के नाम कर दी। एसडीएम जयेंद्र सिंह के 19 जुलाई के आदेश पर दूसरे पक्ष के गुलशन राय ने 28 जुलाई को डीएम से शिकायत कर गंभीर आरोप लगाए। मंडलायुक्त अटल कुमार राय से भी मिलकर शिकायत की गई थी। इसके बाद एसडीएम ने 31 जुलाई को अपना पहला आदेश निरस्त कर दिया।
डीएम उमेश मिश्रा ने एडीएम प्रशासन संजय कुमार, एडीएम वित्त एवं राजस्व गजेंद्र कुमार और एडीएम न्यायिक से मामले की जांच कराकर रिपोर्ट शासन को भेजी। जांच रिपोर्ट के आधार पर शासन की विशेष सचिव अन्नपूर्णा गर्ग ने एसडीएम जयेंद्र सिंह को निलंबित कर राजस्व परिषद कार्यालय से संबंद्ध किया है। बरेली मंडल के आयुक्त को जांच अधिकारी नामित किया गया है।