मोरना। शुकतीर्थ स्थित प्राचीन दंडी आश्रम में बृहमलीन स्वामी गुरु देवेशवराश्रम महाराज के चतुर्थ निर्वाण महोत्सव पर श्रीमद्भागवत सप्ताह का आयोजन किया जा रहा है। शनिवार को कथा में हरिद्वार से आए जगदगुरु शंकराचार्य राज राजेश्वराश्रम महाराज ने कहा कि सनातन धर्म की स्थापना करोड़ों वर्ष पूर्व हुई थी। किन्ही कारणों से सनातन का विस्तार रुका है। सनातन को बचाने का काम गेरुआ वस्त्रधारियों का है।
शंकराचार्य ने कहा कि सुधारवाद आंदोलन के नाम पर सनातन को नुकसान पहुंचाया गया। गांधी जी देश में राम राज्य की स्थापना चाहते थे लेकिन अनुयायियों ने दाम राज्य बना दिया। आज सनातन दयनीय अवस्था में है। पहले तो सनातन भी नहीं बोलते थे। हिंदू कहते थे। आज सनातन तो बोलने लगे हैं। हमारे ऋषियों मुनियों ने अखंड तपस्या कर, त्याग कर सनातन की रक्षा की। सनातन नहीं रहेगा तो भागवत कहां सुनोगे, अनुष्ठान कहां करोगे। हमें सनातन धरोहर की रक्षा करनी है। जन्म मृत्यु कुछ नहीं, बस जरा सी बात है। किसी की आंख खुल गयी किसी आंख लग गई। हमें बार बार जन्म लेना है। मृत्यु है ही नहीं। ईश्वर सर्वशक्तिमान है। इसीलिए वह कण कण में वास करता है। सर्व शक्तिमान कैसे एक रूप में समा सकता है। सनातन आस्था सत्य व दृढ़ है। इस अवसर पर आश्रम के महंत जनार्दन स्वरूप, संचालक मनोहरलाल शर्मा, प्रबोध आश्रम महाराज, जगदीश वशिष्ठ, गंगा दत्त, पुनीत कुमार, विनोद भूषण,विनोद शर्मा, मुख्य यज्ञमान राजकुमार राज व पत्नी पूनम राज आदि मौजूद रहे।