मुजफ्फरनगर। 10 अक्तूबर, 1996, कूकड़ा मंडी में विधानसभा चुनाव की मतगणना। टेबल पर चरथावल सुरक्षित सीट के आखिरी राउंड की गिनती और बाहर मैदान में सपा प्रत्याशी दीपक कुमार के समर्थन में जश्न का माहौल। नतीजे भाजपा के रणधीर सिंह के पक्ष में आने लगे, तो अंदर हंगामा हो गया। गिनती रोक दी गई और कसमें खाई जाने लगीं। दोबारा गिनती कराई, तो रणधीर सिंह ही जीतकर बाहर निकले।
भाजपा से प्रत्याशी थे रणधीर सिंह और सपा से मैदान में उतरे थे दीपक कुमार। आखिरी राउंड की गिनती दो बार करानी पड़ी। पहले 243 मतों से भाजपा के रणधीर सिंह को विजेता घोषित किया गया, लेकिन सपा के एजेंट ब्लाक प्रमुख जिल्ले हैदर ने गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए हंगामा कर दिया। अंदर हंगामा चल रहा था और बाहर दीपक के समर्थन में ढोल बजे रहे थे।
पूर्व विधायक रणधीर सिंह बताते हैं कि दोबारा गिनती कराई गई, तो जीत 244 वोट से हुई। जिल्ले हैदर संतुष्ट नहीं हो रहे थे। मतगणना स्थल पर कसमें खाई जाने लगीं। रणधीर सिंह का कहना है कि काफी देर के बाद जिल्ले हैदर संतुष्ट हुए और भाजपा को इस सीट पर 244 वोट से जीत मिली थी।
इस तरह प्रत्याशियों को मिले थे वोट
प्रत्याशी पार्टी वोट
रणधीर सिंह भाजपा 52499
दीपक कुमार सपा 52255
वेदपाल सिंह बसपा 32627
वाजपेयी की जेब से निकला रणधीर सिंह का टिकट
मुजफ्फरनगर। शहर के रहने वाले रणधीर सिंह को टिकट मिलने का किस्सा भी दिलचस्प है। पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी साल 1993 में टिकटों की घोषणा कर रहे थे। दिल्ली में अटल बिहारी वाजपेयी और मालती शर्मा बैठे हुए थे। इसी दौरान रणधीर सिंह पहुंचे। उन्हें देखते ही अटल बिहारी वाजपेयी ने अपनी जेब में हाथ दिया और एक पर्ची निकालकर रणधीर सिंह के हाथ में रख दी। अटल ने कहा था कि रणधीर सिंह लो यह टिकट और चुनाव लड़ा।