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छात्राओं और स्टाफ से पूछताछ, मजिस्ट्रेटी जांच के लिए विद्यालय पहुंचीं एसडीएम

Tue, 04 Apr 2017 12:22 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर
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गांव तिगाई में कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालय में छात्राओं के कपड़े उतरवाने के प्रकरण में मजिस्ट्रेटी जांच करने के लिए एसडीएम सदर रेणु सिंह विद्यालय पहुंचीं। एसडीएम ने अलग-अलग गोपनीय तरीके से छात्राओं के अलावा स्टाफ के भी बयान दर्ज किए। इस दौरान विद्यालय का गेट बंद करा दिया गया था।          
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विद्यालय में छात्राओं के कपड़े उतरवाने के मामले में अभिभावकों ने 29 मार्च को विद्यालय में बखेड़ा खड़ा कर दिया था। इस प्रकरण की गूंज लखनऊ तक पहुंच गई थी। 30 मार्च को डीएम दिनेश कुमार सिंह ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल कार्रवाई करते हुए वार्डन डॉ सुरेखा तोमर को बर्खास्त कर रिपोर्ट दर्ज कराने के आदेश बीएसए को दिए थे। मजिस्ट्रेटी जांच एसडीएम सदर रेणु सिंह को सौंपी गई थी।

बीएसए चंद्रकेश यादव ने वार्डन को बर्खास्त करते हुए कोतवाली में वार्डन के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कराया था। बीएसए ने वार्डन का चार्ज विद्यालय की शिक्षिका नीता चौधरी को सौंपा था। एक अप्रैल से विद्यालय में छात्राओं को वापस बुलाने के लिए अधिकारी प्रयासरत हैं। बीएसए सहित कई अधिकारी विद्यालय पहुंचकर छात्राओं को समझा-बुझा रहे हैं।
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बेटियों को घर ले गए अभिभावकों से भी अधिकारी फोन पर बातचीत कर रहे हैं। सोमवार को मजिस्ट्रेटी जांच के लिए एसडीएम सदर रेणु सिंह विद्यालय पहुंचीं। एसडीएम ने विद्यालय में छात्राओं को परोसे जाने वाले भोजन के बारे में रसोई माता से भी पूछताछ की। इसके बाद एसडीएम ने विद्यालय का निरीक्षण कर गोपनीय तरीके से छात्राओं और स्टॉफ से अकेले में पूछताछ की।             

एसडीएम ने छात्राओं और स्टॉफ से पूछताछ की है। छात्राओं के अभिभावकों से भी बातचीत की जा रही है। नवरात्र के समाप्त होने पर सभी छात्राएं वापस लौट आएंगी।       
चंद्रकेश यादव, बीएसए            

सुरेखा के बचाव में उतर आई भाकियू            
खतौली। विद्यालय की बर्खास्त वार्डन डॉ सुरेखा तोमर के बचाव पक्ष में भाकियू उतर आई है। भाकियू जिलाध्यक्ष राजू अहलावत का कहना है कि विद्यालय में तीन-चार साल से स्टॉफ में गुटबाजी है। वार्डन के खिलाफ स्टाफ ने बड़ी साजिश रची है। अभिभावकों और छात्राओं को उनके खिलाफ भड़काया गया। प्रशासन ने भी एकपक्षीय कार्रवाई कर दी।

आरोप लगाने मात्र से वार्डन के विरुद्ध इतनी बड़ी कार्रवाई नहीं की जानी चाहिए थी। जिलाध्यक्ष का कहना है कि यह घटना 25 मार्च को होनी बताई जा रही है। 25 मार्च से लेकर 28 मार्च तक स्कूल के सभी स्टॉफ के मोबाइलों की कॉल डिटेल निकलवाई जाए।

जिससे पता चल सके कि स्टॉफ ने किन अभिभावकों से बातचीत की और दोषी पाए जाने पर स्टॉफ के विरुद्ध भी बर्खास्तगी की कार्रवाई की जानी चाहिए। प्रधानमंत्री ने भी स्वच्छता को लेकर देशभर में आंदोलन चला रखा है। इस अभियान का अनुपालन करने की सजा वार्डन को मिली है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर वार्डन को न्याय नहीं मिला तो भाकियू जनपद में आंदोलन के लिए मजबूर होगी।            
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