छपार (ब्यूरो)। गर्भवती महिला की डिलीवरी कराने का फर्ज पूरा करने गई छपरा गांव की आशा कर्मी से गैंगरेप की वारदात से आक्रोशित आशाएं रो पड़ीं। जिलेभर से जुटी स्वास्थ्य विभाग की आशाओं ने कहा कि गांवों में जच्चा-बच्चा की स्वास्थ्य सुरक्षा में रात दिन घूमना पड़ता है। ऐसे में किस पर भरोसा किया जाएगा।
एसपी सिटी प्रदीप गुप्ता को विरोध झेलना पड़ा। इसी बीच गैंगरेप की शिकार आशा के बच्चों की परवरिश कैसे होगी, मुफलिसी से जूझते परिवार का खर्च कौन उठाएगा, यह कहते हुए कई आशाएं रोने लगीं। गाजियाबाद से आई ऊषा शर्मा ने कहा कि दिनरात गांव-गांव आशाएं घूमती हैं।
गैंगरेप के दोषियों ने भरोसे का कत्ल किया है। आशाकर्मी निरमला बरवाला, मुनेश, अंजू, अनिता, ममता, रानी, कविता, कमलेश आदि ने महिला सुरक्षा को लेकर पुलिस के नजरिए की कड़ी भर्त्सना की। शव छपरा पहुंचने पर आशाओं ने एंबुलेंस से उतरने नहीं दिया।