पुलिस पर हमला कर सुर्खियों में आया था इमलाख
मुजफ्फरनगर। करीब डेढ़ दशक तक कोचिंग सेंटर संचालक की आड़ में अवैध संपत्ति अर्जित कर रहा इमलाख खान वर्ष 2017 में शेरपुर बवाल के बाद पहली बार पुलिस की नजर में आया था। इसके बाद ही पुलिस उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई के लिए तैयार हुई, जिसकी परिणति रविवार को उसकी करोड़ों की संपत्ति कुर्क होने पर हुई।
शहर कोतवाली क्षेत्र के गांव शेरपुर निवासी शिक्षा माफिया इमलाख खान की पुलिस-प्रशासन के बीच पहचान वर्ष 2017 तक महज कोचिंग सेंटर संचालक और फर्जी डिग्री का धंधा करने वाले के रूप में थी। यही कारण रहा कि उसके खिलाफ वर्ष 2008 व 2013 में फर्जी डिग्रियों से संबंधित धोखाधड़ी के तीन मुकदमे दर्ज होने के बावजूद पुलिस उसके खिलाफ बड़ी कार्रवाई से बचती रही। सूबे में भाजपा सरकार बनने के बाद 24 अगस्त 2017 को इमलाख खान को पुलिस ने गंभीरता से लिया, जब गोकशी की सूचना पर पहुंची पुलिस टीम पर गांव शेरपुर में बड़ा हमला किया गया। पुलिस के अनुसार इमलाख खान की अगुवाई में उग्र भीड़ ने न केवल पुलिसकर्मियों को बंधक बनाकर उनके साथ मारपीट की, बल्कि थाना पुलिस की चीता बाइक भी फूंक डाली और डायल-112 की गाड़ियों के शीशे तोड़ दिए गए। पुलिस ने इस मामले में इमलाख खान को मुख्य आरोपी के तौर पर नामजद कर जेल भेजा। इसके बाद वर्ष 2018 में इमलाख खान के खिलाफ शहर कोतवाली में ही धमकी देकर रंगदारी मांगने का मुकदमा दर्ज हुआ, जिसके बाद 15 अप्रैल 2019 को उसके खिलाफ गैंगस्टर एक्ट के तहत मुकदमा पंजीकृत किया गया। इसी गैंगस्टर एक्ट 14 (1) के तहत रविवार को इमलाख खान के खिलाफ पुलिस-प्रशासन ने संपत्ति कुर्क की। इससे पहले शहर कोतवाली पुलिस ने ही इमलाख खान की गांव बामनहेड़ी में स्थित करीब 15 बीघा जमीन व एक स्कूटी को करीब तीन माह पूर्व जुलाई 2020 में कुर्क किया था।
इन्होंने कहा ........
शहर कोतवाली प्रभारी इंस्पेक्टर अनिल कपरवान ने बताया कि इमलाख के खिलाफ कुल छह मुकदमे दर्ज हैं, जिनमें से तीन धोखाधड़ी, एक रंगदारी, एक बवाल और एक गैंगस्टर एक्ट से संबंधित है। इनमें से तीन शहर कोतवाली व तीन सिविल लाइंस थाने में दर्ज हैं।