-इमाम बारगाह में मजलिस को मौलाना सत्तार नकवी ने किया खिताब
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संवाद न्यूज एजेंसी
खतौली। मोहर्रम के तीसरे दिन मजलिस को खिताब फरमाते हुए मौलाना सत्तार नकवी ने कहा कि इमाम हुसैन ने अपने कुनबे के साथ करबला में पहुंच कर खेमे लगा दिए।
रविवार को गांव शेखपुरा हवा महल स्थित इमाम बारगाह में मजलिस को खिताब फरमाते हुए मौलाना ने कहा कि इमाम हुसैन ने कई घोड़े बदले, मगर कोई भी घोड़ा आगे नहीं बढ़ सका। उन्होंने वहां के लोगों से पूछा कि इस जमीन का नाम क्या है। किसी ने कहा कि इसे नेनवां कहते हैं।
किसी ने कहा इसे शत्ते फरात कहते हैं। फिर मौला ने पूछा क्या इसका कोई और नाम भी है। वहां के लोगों ने कहा कि हां इसका नाम करबला भी है। करबला का नाम सुनते ही काफिले को रोक दिया गया। यही वो जगह है, जहां हमारी कब्रे बनेंगी। यहीं हमारे बच्चे जिबाह किए जाएंगे। यहीं हमारा खून बहाया जाएगा और हमारी औरतों को बेपर्दा किया जाएगा। फिर वहां के जमींदारों को बुलाया।
लोगों ने कहा कि मौला आप यहां रुकने का इरादा न करें। इस सर जमीन पर जो भी रुका उसे तकलीफ जरूर पहुंची है। इमाम ने फरमाया अल्लाह का हुक्म है। कयामत तक हमें यहीं रहना है, इस जमीन को इमाम हुसैन ने 60 हजार दिरहम तीन शर्तो पर खरीद ली।
पहली शर्त यह जब दुश्मन हमें कत्ल कर दें और बेकफन छोड़ कर चले जाएं तो हमें दफन कर देना। दूसरी यह कि हमारे जायरीन को हमारी कब्रों के निशान बता देना। तीसरी यह कि हमारे जायरीन को तीन दिन मेहमान रखना। तीन दिन मेहमान रखने की शर्त क्यों लगाईं ताकि पता चल जाए। हमारा आका तीन दिन का भूखा प्यासा शहीद कर दिया गया।
करबला के वाकयात सुनकर अजादार गमगीन हो गए। मरसिया खान शालू जैदी, सलमान जैदी, अरशद जैदी ने की। इसरार जैदी, अब्बास जैदी, समद जैदी, मिनहाल जैदी, रजी हैदर, फराज जैदी, शबी हैदर जैदी आदि मौजूद रहे।