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लगाई जा रही थी रोज दस लाख से अधिक की चपत

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रतनपुरी के गांव सिकंदरपुर में लगा बायोडीजल पंप, जिसे पहले पॉलीथिन में लपेट दिया गया था। तेल बेचने - फोटो : MUZAFFARNAGAR
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लगाई जा रही थी रोज दस लाख से अधिक की चपत
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मुजफ्फरनगर। अवैध बायोडीजल पंपों के जरिये तेल माफिया रोजाना सरकार व पेट्रोल पंप डीलरों को राजस्व व कमीशन में दस लाख रुपये से अधिक की चपत लगा रहे थे। जनपद में 32 बायोडीजल पंप चिह्नित किए जा चुके हैं, जहां रोज करीब 32 हजार लीटर से अधिक पेट्रोल-डीजल की खपत होती थी। घटतौली व मिलावटखोरी से होने वाला मुनाफा भी जोड़ दें तो तेल के इस खेल में माफिया रोज 12 लाख से अधिक के वारे-न्यारे कर रहे थे।
भोपा क्षेत्र के गांव रुड़कली में हुए अग्निकांड में दो लोगों की मौत के बाद सामने आए अवैध बायोडीजल पंपों की जिले में भरमार थी। अब तक जनपद में 32 बायोडीजल पंप चिह्नित हो चुके हैं, जिनमें सबसे अधिक 15 भोपा-मोरना व ककरौली क्षेत्र में हैं। जानसठ, खतौली, पुरकाजी, छपार व रतनपुरी क्षेत्र में भी अवैध बायोडीजल पंप लगे हुए थे। ये सभी रुड़कली अग्निकांड के बाद रातोरात बंद किए जा चुके हैं। कुछ पंपों पर डीजल के साथ पेट्रोल भी बेचा जाता था। ग्रामीणों के मुताबिक डीजल और पेट्रोल उस भाव पर देते थे, जो भाव कंपनी के पेट्रोल पंप पर मिलता है। पंप भी ऐसे स्थानों पर लगाए गए थे जहां से काफी दूर तक कंपनी का पेट्रोल पंप नहीं है। भौराकलां के शिकारपुर, कपूरगढ़, जौली, मोरना के खादर क्षेत्र में ऐसे ही स्थानों पर पंप लगे थे, जहां से कंपनी के पेट्रोल पंप दस से पंद्रह किलोमीटर दूर है। इसलिए यहां पर तेल की बिक्री भी काफी होती थी। अब हर अवैध पंप पर हर रोज औसतन एक हजार लीटर पेट्रोल-डीजल की बिक्री जोड़ी जाए तो यह औसतन 74 रुपये प्रति लीटर के हिसाब से 23 लाख रुपये बैठती है। इसमें करीब 40 प्रतिशत सरकारी टैक्स 9.60 लाख रुपये होता है, जबकि प्रति लीटर 2-3 रुपये लीटर के हिसाब से ही पेट्रोल पंप मालिकान का कमीशन करीब एक लाख रुपये बैठता है। इसके अलावा, घटतौली व मिलावटखोरी को भी जोड़ा जाए तो तेल के खेल में मुनाफे की यह रकम करीब 12 लाख रुपये प्रतिदिन बैठती है। इतने मोटे मुनाफे के बावजूद प्रशासन या संबंधित विभाग ने न तो कभी इन्हें लगाए जाने संबंधी गाइडलाइन का पालन किया और न ही इन प बिकने वाले पेट्रोल-डीजल की गुणवत्ता की ही जांच की गई।
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प्रशासन अंजान, कहां से लाते थे पेट्रोल-डीजल
मुजफ्फरनगर। तेल के काले खेल में शामिल अवैध बायोडीजल पंप आखिर कहां से डीजल और पेट्रोल लाते थे, इसकी किसी को कोई जानकारी नहीं है। पेट्रोल डीलर्स एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष अखिलेश गुप्ता का कहना है कि इन अवैध पंपों पर कभी भी मान्य पेट्रोल पंप से डीजल-पेट्रोल की आपूर्ति नहीं होती थी। इसके चलते यह बड़ा रहस्य है कि आखिर इन लोगों को पेट्रोल-डीजल की आपूर्ति कहां से और किस माध्यम से की जाती थी ? पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष अखिलेश गुप्ता का कहना है कि बायोडीजल पंप शासन के निर्देशानुसार और उनकी गाइडलाइन के अनुसार ही स्थापित होने चाहिए। सरकार को नियम लागू कर इसके लिए जवाबदेही तय करनी चाहिए।
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