मुजफ्फरनगर। हमारे यहां व्यस्क आबादी में हर तीसरा व्यक्ति हाई ब्लड प्रेशर से पीड़ित है। 41 से 75 वर्ष आयु वर्ग में तो हर दूसरा व्यक्ति हाइपरटेंशन का शिकार हैं। स्त्री-पुरुष दोनों में ही इस खतरे की आशंका लगभग बराबर है।
राजवंश हॉस्पिटल के हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ सत्यम राजवंशी का कहना है कि हमारे यहां केवल एक तिहाई लोगों को ही अपनी बीमारी का ज्ञान है। दुर्भाग्य यह है की इस बीमारी के बारे में पता होने के बाद भी केवल एक तिहाई लोग ही इसका इलाज कराते हैं। ह्रदय रोगों के बढ़ते प्रकोप के लिए हाई बीपी एक मुख्य कारण है।
क्यों बढ़ता जा रहा है ब्लड प्रेशर?
आधुनिक जीवन शैली में शारीरिक व्यायाम का अभाव, बढ़ता दिमागी तनाव, धूम्रपान व तंबाकू शराब आदि का नशा, खाने में अत्यधिक वसा, नमक, मीठा तथा ताजे फल और सब्जियों का अभाव, ये सब बढ़ते ब्लड प्रेशर के मुख्य कारण हैं। हाई बीपी के साथ बढ़ते मोटापे, शुगर और कोलेस्ट्रॉल के मेल से ही युवा वर्ग में भी ह्रदय रोग तेजी से बढ़ते जा रहे हैं।
समस्या एक, बीमारी अनेक
- हमारे शरीर की धमनियों में ब्लड का प्रेशर बढ़ने से सभी अंगों पर दुष्प्रभाव पड़ता है, इसीलिए हाइपरटेंशन को साइलेंट किलर भी कहा जाता है। दिल की मास पेशियां पर अतिरिक्त दबाव पड़ने से और नसें संकुचित होने से दिल फैल जाता है और हार्ट अटैक की संभावना बढ़ जाती है।
ब्रेन स्ट्रोक या हैमरेज
दिमाग में अत्यधिक बीपी से नसों के फट जाने या खून जमने से जान लेवा लकवा हो सकता है। गुर्दों की नसों में क्षति के कारण गुर्दों का फ़ैल होने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। आंख के परदे की नसों के संकुचित होने से धीरे-धीरे दृष्टि कम हो जाती है और नस फटने से अंधापन आ सकता है।
प्रतिदिन 45 मिनट का व्यायाम और योग साधना
हर रोज कम से कम 30 मिनट व्यायाम करें और 15 मिनट प्राणायाम और सूर्य नमस्कार की क्रिया करें। अपने वजन को हर हफ्ते एक बार नोट करें और उससे बढ़ने न दें।