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नक्सली हमले में शहीद हुआ जड़वड़ कटिया का हरविंद्र 

Wed, 20 Jul 2016 01:31 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर
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शहीद हरविंद्र का फाइल फोटो। - फोटो : अमर उजाला
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बिहार राज्य के गया जिले में रविवार रात नक्सली हमले में गांव जड़वड़ कटिया के किसान भीष्म सिंह का 24 वर्षीय पुत्र हरविंद्र पंवार शहीद हो गया। वह सीआरपीएफ में सिपाही था। शहीद के परिजनों में कोहराम मचा है। पूरा गांव शोक में डूबा है। परिजनों ने बताया कि बुधवार सुबह तक उसका शव गांव में पहुंचने की उम्मीद है। एसडीएम जानसठ उमेशचंद मिश्रा ने गांव में पहुंच कर परिजनों को सांत्वना दी।  

रविवार रात सीआरपीएफ कोबरा बटालियन गया जिले में घने जंगलों में नक्सली आतंकवादियों के छिपे होने की सूचना पर सर्च अभियान चला रही थी। तभी रास्ते में बिछाई गई बारूदी सुरंग के धमाके में कई जवान शहीद हो गए।  जिनमें जिले ककरौली थाना क्षेत्र के गांव जड़वड़ कटिया निवासी हरविंद्र पंवार भी शहीद हो गया। उसकी मां धनवती का रो-रोकर बुरा हाल है। पिता की पथराई आंखें बेटे का शव आने का इंतजार कर रही है।
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किसान भीष्म सिंह के पुत्र हरविंद्र का बड़ा भाई सुंदर खेती करता है तथा दूसरा भाई हरेंद्र रेलवे पुलिस जगाधरी हरियाणा में तैनात है। हरविंद्र ने मीरापुर के बसंत इंटर कालेज से इंटर किया था।  वर्ष 2010 में रामपुर की सीआरपीएफ बटालियन में भर्ती हुआ। उसने कोबरा पोस्ट के लिए लातूर में  ट्रेनिंग ली। चार वर्ष पूर्व उसे बिहार के नक्सल प्रभावित इलाकों में आतंकवादी गतिविधियों को रोकने की जिम्मेदारी देकर बिहार के गया जिले में कोबरा बटालियन के साथ भेजा गया। मेरठ के जिले नैयडू गांव में परिजनों ने उसकी शादी तय कर रखी थी।

हरविंद्र पंवार के शहीद होने से सीना हुआ चौड़ा  
बिहार में नक्सली हमले में ककरौली थाना क्षेत्र के गांव जड़वड़ कटिया निवासी जवान हरविंद्र पंवार के शहीद की खबर मिलते ही परिवार गम में डूब गया और क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। परिजनों की आंखों के अंासू थमने के नाम नहीं ले रहे। परिजनोें को शव यहां पहुंचने का इंतजार है। मंगलवार रात एसडीएम उमेश चंद्र मिश्र व सीओ सूक्ष्म प्रकाश भी शहीद जवान के परिजनों को ढांढस बंधाया। 

बिहार राज्य के गया जिले में सोमवार को देर रात सीआरपीएफ कोबरा बटालियन घने जंगलों में नक्सलियों के छिपे होने की सूचना पर सर्च अभियान चला रही थी। इस बीच रास्ते में बिछाई गई बारूदी सुरंग के द्वारा किए गए हमले में दर्जनों जवान शहीद हो गए। इनमें से जिला मुजफ्फरनगर के थाना ककरौली क्षेत्र के जड़वड़ कटिया में चौधरी भीष्म सिंह का 25 वर्षीय पुत्र हरविंद्र पंवार भी इस हमले में शहीद हो गया।

जवान के शहीद होने की खबर मिलते ही पूरा परिवार गम में डूब गया। उसकी माता धनवती का रो-रोकर बुरा हाल है। वहीं पिता भीष्म सिंह की पथराई आंखें अपने नौजवान बेटे के शव के आने का इंतजार कर रही है। सन् 2010 में रामपुर में हरविंद्र पंवार सीआरपीएफ में भर्ती हुआ था।

उसने कोबरा पोस्ट के लिए महाराष्ट्र के लातूर प्रशिक्षण केंद्र में प्रशिक्षण दिलाया गया था। 2012 में बिहार के नक्सली प्रभावित इलाकों में गतिविधियों को रोकने की जिम्मेदारी जिला गया में सीआरपीएफ की 205 कोबरा बटालियन के साथ उसे भेजा गया। रविवार की देर रात नक्सली हमले में जवान हरविंद्र पंवार शहीद हो गया था। जवान के शहीद होने से पूरा परिवार गम में है। 

दोस्तों के साथ शिक्षा ग्रहण की थी
शहीद जवान हरविंद्र पंवार अपने गांव के दोस्तों में पंकज पुत्र बिजेंद्र एक प्राइवेट कंपनी में जॉब करता है। प्रमोद पुत्र देवेंद्र जो सीआरपीएफ में हेडकांटेबिल है। सुमित यूपी पुलिस में सिपाही है। अरुण पुत्र सतबीर आर्मी में जम्मू में तैनात है। अनुज पुत्र हरबीर दिल्ली पुलिस में हेडकांस्टेबल है। इन दोस्तों के साथ प्रारंभिक शिक्षा गांव कटिया के मिहीर भोज शिक्षा सदन स्कूल में कक्षा पांच की परीक्षा पास की थी।

इसके बाद दोस्तों के साथ जटवड़ कटिया के महर्षि दयानंद हाईस्कूल में कक्षा पांच से कक्षा आठ तक शिक्षा ग्रहण की। इसके बाद ककरौली के किसान इंटर कालेज में कक्षा दस तक पढ़ाई की। कक्षा दस के बाद शहीद हरविंद्र पंवार ने मीरापुर के बंसत शिक्षा सदन इंटर कालेज से कक्षा 12 की शिक्षा ग्रहण की। दोस्त बताते हैं कि हरविंद्र पंवार पढ़ाई लिखाई में उनसे होशियार और मृदुभाषी था।

शहीद का साथी जवान भी गांव पहुंचा
शहीद जवान हरविंद्र पंवार की मौत की खबर सुनकर बिहार में साथ रहने वाला उसका साथी जवान हापुड़ के गांव कस्तलेकी मढय्या निवासी मोहित कुमार भी जड़वड़ कटिया में पहुंचा। उसने गमजदा परिवारजनों को बताया वह भी बिहार में सीआरपीएफ की 205 कोबरा बटालियन में हरविंद्र के साथ था।
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फर्क सिर्फ इतना था कि हरविंद्र पंवार 18 नंबर की टोली में था और वह पांच नंबर की टोली में था। हम दोनों आपस में दोस्त थे। मोहित ने बताया कि हरविंद्र पंवार उसको सबसे अच्छा दोस्त मानता था। खबर मिलते ही मुझे बेहद दुख हुआ और गांव में दोस्त के अंतिम दर्शन करने के लिए चला आया। 
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