कांफ्रेंस में विचार रखते वक्ता।
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किदवईनगर के जैनिबिया गर्ल्स इंटर कॉलेज में एक जन्नत उल बकी कॉन्फ्रेंस की गई। मौलाना मोहम्मद हुसैनी ने कहा कि इस्लाम का दहशतगर्दी से कोई ताल्लुक नहीं है। 95 साल पहले मदीना में कब्रों को निशाना बनाकर इसकी शुरुआत की गई।
मौलाना ने कहा कि मदीना ए मनव्वरा के कब्रिस्तान जन्नत उल बकी में मौजूद हजरत मुस्तफा, मोहम्मद साहब की बेटी जगबे फातिमा, नवासे हसन, इमामे जैनुल आबेदीन, जाफर सादिक और नबी की बीवियां एवं उनके सैकड़ों असहाब की कब्रें और मजारात मौजूद थे, जिन्हें अब से 95 साल पहले दहशतगर्दों ने अपनी दहशत का निशाना बनाकर तोड़ डाला।
95 साल बाद फिर किसी दहशतगर्द ने नबी ए करीम के रोजे और मस्जिद ए नबवी के करीब फिर एक बम विस्फोट किया। तमाम मुसलमानों को एकजुट होकर नबी ए पाक के रोजे की हिफाजत और टूटे हुए मजारात की तामीर करनी चाहिए। जन्नत उल बकी कांफ्रेंस दहशतगर्दी के खिलाफ एक कदम है।
मौलाना मजाहिर हुसैन, कौसर, शादाब काजमी, अरशद, आलम, हुसैन मेहंदी, कर्रार मौलाई, मौलाना मिर्जा, जावेद रजा, अमीर हैदर, फसी हैदर, गजनफर नकवी ने विचार रखे। शुरुआत तिलावते कुरान से कारी इम्तियाज ने की और संचालन नईम आलम ने किया।