मुजफ्फरनगर। जिला अस्पताल में वायरल बुखार और डायरिया पीड़ित मरीजों की भरमार है। ओपीडी में भी प्रतिदिन 300 से अधिक मरीज पहुंच रहे हैं, जिनमें बुखार और डायरिया पीड़ित काफी मरीज शामिल हैं। गंभीर मरीजों को भर्ती कर उपचार दिया जा रहा है।
जिला अस्पताल में वायरल बुखार सहित डायरिया और गले में संक्रमण के रोगियों की भरमार है। बुखार की शुरुआत हलका नजला और खांसी से होती है। धीरे-धीरे गले मेंं खराश के बाद अचानक तेज बुखार चढ़ता है, जिसमें पूरा शरीर दर्द करने लगता है। चिकित्सक ऐसे लक्षण आने पर वायरल बुखार मानकर उपचार दे रहे हैं। पेट की समस्या भी लोगों को परेशान कर रही है, जिसमें डायरिया की शिकायत सर्वाधिक है। जिला अस्पताल के वरिष्ठ परामर्शदाता डॉ.योगेन्द्र त्रिखा का कहना है कि इस मौसम में वायरल बुखार का संक्रमण लोगों को जकड़ रहा है।
नजले और गले में खराश से बीमारी की शुरुआत होती है। उपचार में लापरवाही खतरनाक है। बताया कि जिला अस्पताल में डायरिया के रोगियों की संख्या भी बढ़ रही है। उन्होंने सलाह दी कि नजला-खांसी और गला खराब होने पर चिकित्सक से परामर्श लें। इस मौसम में बासी खाना भी नुकसानदेय है। इसलिए पेट की बीमारी से बचने के लिए हाइजीनिक फूड जरूरी है।
अस्पताल में प्रतिदिन लग चढ़ रहा 200 बोतल ग्लूकोज
जिला अस्पताल में बेड आक्यूपेंसी 100 प्रतिशत से अधिक पहुंच रही है। बुखार और डायरिया के सर्वाधिक मरीज भर्ती हैं। जिन्हें ग्लूकोज की औसतन 200 बोतल प्रतिदिन चढ़ाई जा रही है। शुक्रवार को भर्ती मरीजों की संख्या 117 पर पहुंच गई जबकि ओपीडी में प्रतिदिन 1700 से अधिक मरीज आ रहे हैं।
वायरल बुखार के मुख्य लक्षण
- तेज़ बुखार, शरीर का तापमान 103 डिग्री हो जाना।
- बुखार के साथ कंपकंपी और तेज ठंड महसूस होना।
- मांसपेशियों और जोड़ों में हल्का और तेज दर्द होना।
- बुखार के दौरान सिर में तेज या लगातार सिरदर्द होना।
- शरीर में बहुत ज़्यादा कमजोरी और सुस्ती महसूस होना।
- बुखार से पहले गले में सूखापन, दर्द, या खराश होना।
- नाक बहना और खांसी, जुकाम या सूखी नाक होना।