मुजफ्फरननगर। जनपद में गर्भवती महिलाओं की अब अनिवार्य रूप से एचआईवी की जांच की जाएगी। निर्देशित किया गया है कि दो वर्ष के भीतर 95 प्रतिशत एचआइवी पाजीटिव महिलाओं की जांच सुनिश्चित कर ली जाए। इसके लिए स्थानीय स्तर से डब्लूबीएफपीटी यानी होल ब्लड फिंगर प्रिक टेस्ट किट क्रय करने के निर्देश दिये गए हैं।
एचआइवी पाजीटिव गर्भवती महिलाओं से बच्चों में एचआईवी का संक्रमण न फैले, इसके लिए शासन ने विभाग को एचआईवी व सिफलिस की जांच अनिवार्य रूप से किए जाने के आदेश दिए हुए हैं। शासन की ओर से स्वास्थ्य विभाग को पहले से किट भेजी जा रही है। जो सीएचसी भेजकर एएनएम को उन्हें वैक्सीन के साथ उपलब्ध कराई जाती रही है। जिसके उपरांत एएनएम गांव गांव जाकर गर्भवती महिलाओं को पहले चिह्नित करती है, फिर जांच व टीकाकरण करती हैं। इस बार फिर से संयुक्त निदेशक बीएसडी डा. गीता अग्रवाल ने जिले के सीएमओ और सीएमएस को पत्र लिखकर आवश्यक दिशा निर्देश जारी किए हैं।
उन्होंने बताया कि प्रत्येक वर्ष उचित जांच व उपचार के अभाव में संक्रमित गर्भवती महिला से जन्मे औसतन दो से तीन प्रतिशत शिशु एचआइवी संक्रमित हो जाते हैं। इसलिए कार्यक्रम की निरंतरता बनाए रखना आवश्यक है। उन्होंने निर्देशित किया कि लक्ष्य के की प्राप्ति के लिए यूनिवर्सल स्क्रीनिंग के अंतर्गत सभी गर्भवती महिलाओं की गर्भावस्था के दौरान कम से कम एक बार एचआइवी की जांच किया जाना आवश्यक है।