मुजफ्फरनगर। जीएसटी सुधार 2.0 लागू होने के बाद कुछ व्यापारियों के समक्ष समस्या आ रही है। नए व्यापारियों के सामने सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि उनके पास 50 लाख से अधिक के माल का पुराना स्टॉक है जबकि इनपुट टैक्स क्लेम का समय वर्ष 2026 तक का ही है। व्यापारियों का कहना है कि यदि निर्धारित समय सीमा में माल नहीं बिका तो वे इनपुट टैक्स का क्लेम नहीं कर पाएंगे, जिसका उन्हें नुकसान उठाना पड़ेगा।
व्यापारियों को दावा है कि अधिक स्टॉक के बावजूद इनपुट टैक्स क्रेडिट का दावा करने के लिए उन्हें कम समय दिया गया है। 22 सितंबर को जीएसटी के लागू होने के समय, व्यापारियों को अपने स्टॉक की जानकारी देकर एमआईटीसी प्राप्त करने के लिए कहा गया था। व्यापारियों का कहना है कि एक निश्चित तिथि के बाद माल पर आईटीसी का दावा करने की समय-सीमा कम है। सुझाव है कि इस प्रक्रिया को सरल बनाया जाना चाहिए ताकि आईटीसी का दावा किया जा सके।
जानसठ रोड स्थित शॉप संचालक विजय प्रताप सिंह का कहना है कि उन्होंने तीन वर्ष पहले व्यापार शुरू किया था। उनकी दुकान में एक करोड़ से अधिक का स्टॉक है, जिसकी बिक्री में दो से तीन वर्ष भी लग सकते हैं। लेकिन आईटीसी क्लेम का समय मात्र एक वर्ष का है।
दुकानदार हर्ष कुमार का कहना है कि पुराने दाम और नई दर के अंतर को व्यापारी को समझना मुश्किल हो रहा है। उनके पास लाखों रुपये की कीमत का पुराना स्टॉक है, जिसकी आईटीसी क्लेम के लिए एक वर्ष का समय ही दिया गया है। उन्हें नहीं लगता कि एक वर्ष के भीतर पुराने स्टॉक का सामान बिक जाएगा।
जीएसटी ज्वाइंट कमिश्नर कार्यपालक राजनाथ तिवारी का कहना है कि जीएसटी सुधार 2.0 के तहत व्यापारियों को जो समस्या आ रही है, उनका अध्ययन किया जा रहा है। शासन से जो निर्देश मिलेंगे उनके आधार पर कार्रवाई की जाएगी।