मखियाली। शहर से छह किलोमीटर दूर भोपा-शुक्रताल रोड पर है मखियाली गांव। नगर की नई कालोनियां यहां तक पहुंच गई हैं। पंचायत अध्यक्ष के घर का पता मालूम किया तो हर कोई बताने को उतावला दिखा। गुमनाम सी आंचल का नाम अब गांव की हर जुबां पर है।
सड़क से थोड़ा चलने के बाद ही पिछड़ी बस्ती में उनके आशियाने पर चहलकदमी दिखती है। बधाई देने वालों की आवाजाही है, तो बुजुर्ग इधर-उधर जीत की चर्चा में मशगूल हैं।
आधे-अधूरे बने मकान में खुशियों का आलम छाया है। चारपाई और कुर्सियों पर ग्रामीण फख्र से बतिया रहे हैं। महिलाएं घर में आंचल को लड्डू खिलाकर जीत की बधाई दे रही हैं। गांव की बेटियों ने पंचायत अध्यक्षा को फूल देकर मान बढ़ाया। घर का अजीब नजारा देख आंचल के दो बच्चे तनुष और गोविंद भी हैरत में हैं।
आज से पहले कभी उन्होंने परिवार में ऐसा सबकुछ होते हुए नहीं देखा था। गोविंद मां की फूलों की माला को बार-बार छूकर देखता है। मां की जिंदगी अब रोजमर्रा के दिन से जुदा हो चुकी है। सलीके की साड़ी में मुस्कान बिखेरती आंचल को बुजुर्ग महिलाएं अचंभे से निहार रही हैं। कई महिलाएं तो ऐसी सामने आईं जो आज से पहले कभी उनसे नहीं मिली थी।
शादी के बाद छह साल का वक्त मखियाली में कैसे गुजर गया, पता ही नहीं चला। आर्थिक रूप से परिवार के हालात बेहतर नहीं हैं।
बरामदे में रखी गेहूं की टंकी, आम आदमी जैसी रसोई और मकान की स्थिति से जाहिर है कि आंचल की जिंदगी में जो बदलाव का झोंका आया है, उसकी उसे उम्मीद नहीं थी। गांव की शिक्षित बेटियां भी उन्हें आइडियल के रूप में देख रही हैं। आंचल की सास प्रमिला सब भगवान पर छोड़ती हैं।
कहती हैं कि बहू के भाग्य ने घर की किस्मत पलट दी है। देवरानी निशा और देवर सहदेव घर में आई लालबत्ती की खुशियों में सराबोर हैं। मन की उमंग चेहरों पर फूट रही है। घर के मुखिया ताऊ रणपाल सिंह ग्रामीणों की चुहलबाजी पर ठहाके लगा रहे हैं।
आंचल के पति अर्जुन तोमर नहीं दिखे तो पता चला कि वो केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री डॉ. संजीव बालियान के गांव कुटबी में कृतज्ञता व्यक्त करने गए हैं।
बताते चलें कि आंचल देहरादून के चकरोता कसबे की मूल निवासी है। ग्राम प्रधान संदीप चौधरी कहते हैं कि गांव का सौभाग्य है, जो जिला पंचायत की नुमाइंदगी करने का अवसर मिला है।
वहीं, आंचल को प्रशासन ने सुरक्षा के लिहाज से एक गनर दे दिया है, लेकिन लालबत्ती लगा सरकारी वाहन शपथ ग्रहण के बाद उपलब्ध होगा।