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किसानों के नाम पर हो रहा मंडी शुल्क की चोरी का खेल

Mon, 23 Oct 2017 12:15 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर
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गुड़। - फोटो : अमर उजाला
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वेस्ट यूपी से बिना मंडी शुल्क चुकाए गुड़ की हरियाणा, पंजाब और राजस्थान आदि राज्यों में भेजा जा रहा है। यह सारा खेल किसानों के नाम पर हो रहा हैै, चूंकि किसान अपने उत्पाद को कहीं भी ले जाकर बेच सकता है, इसी की आड़ लेकर व्यापारी मंडी शुल्क की चोरी कर रहे हैं। हर दिन गुड़ से लदे सैकड़ों वाहन सीमा पार दूसरे राज्यों में जा रहे हैं और विभाग को मंडी शुल्क की चपत लग रही है। 
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 एशिया की सबसे बड़ी गुड़ मंडी मुजफ्फरनगर में तो एक दूसरा खेल भी चल रहा है। यहां माल की मात्रा आधी दिखाकर मंडी शुल्क की चोरी की जा रही है। इसके अलावा कुछ माफिया गुड़ सीधे कोल्हू से खरीदकर बिना शुल्क चुकाए बाहर ले जा रहे हैं। बागपत में बड़ी संख्या में कोल्हू पर गन्ने की पेराई शुरू हो चुकी है। बड़ौत और अग्रवाल मंडी टटीरी की मंडी में गुड़ की आवक अपेक्षा से कम है। गुड़, पेड़ी और खुरपा वैरायटी के दाम हरियाणा में करीब सौ से डेढ़ सौ रुपये अधिक है, जिसके कारण गुड़ माफिया सक्रिय हो गए हैं और हरियाणा व दिल्ली गुड़ ले जा रहे हैं।

शामली से भी रोजाना करीब 500 से 700 क्विंटल तक गुड़ मंडी शुल्क चोरी कर हरियाणा और पंजाब जा रहा है। प्रतिदिन मंडी में  1500 से लेकर 1700 क्विंटल गुड़-शक्कर की आवक  होती है। गुड़ की तस्करी रुकने पर यह बढ़कर  2500 से लेकर 3000 क्विंटल तक हो जाती है। किसानों के नाम पर गुड़ माफिया इस कार्य को अंजाम दे रहे हैं। मेरठ करनाल हाइवे और पानीपत-खटीमा मार्ग से ट्रक, टेंपू और ट्रैक्टर ट्रालियों से गुड़ हरियाणा और पंजाब ले जाया जा रहा है।
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 सहारनपुर में भी सीजन चालू होते ही गुड़ पर मंडी शुल्क की चोरी शुरू हो गई है। जिले के गुड़ को व्यापारी हरियाणा मंडी में जाकर बेच रहे हैं। मंडी समिति कर्मचारियों ने हाल ही में आठ कुंतल गुड़ पकड़कर इसका खुलासा भी किया और छह हजार रुपया जुर्माना वसूला था। मंडी में अभी तक करीब 400 क्विंटल गुड़ की आवक हुई है। मंडी सचिव अनिल कुमार ने बताया कि गुड़ की तस्करी रोकने के लिए समिति कर्मचारी नियमित चेकिंग कर रहे हैं।

बिजनौर में चांदपुर, किरतपुर व धामपुर की गुड़ व खांडसारी मंडी प्रसिद्ध हैं। यहां पर राजस्थान के गुड़ व्यापारी क्रेशर व कोल्हू संचालकों को एडवांस पैसा देकर गुड़ की खरीदारी कर रहे हैं। यह गुड़ मंडी शुल्क की चोरी कर ले जाया जाता है। जिले के अधिकारी सब कुछ देखकर भी आंख बंद किए हैं। लंबे समय से ऐसे किसी भी मामले में किसी व्यापारी के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई है।

प्रदेश में 2.5 प्रतिशत है मंडी शुल्क
प्रदेश में गुड़ पर 2.5 प्रतिशत मंडी शुल्क लगता है, जिसे बचाने के लिए व्यापारी कोल्हू से सीधे गुड़ खरीद लेते हैं। हरियाणा रेट भी अधिक है, ऐसे अधिक रेट और मंडी शुल्क बचाकर दोहरा मुनाफा इस खेल में लगे माफिया करते हैं।

गुड़ के अवैध कारोबार और मंडी शुल्क की चोरी से सरकार को लाखों रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा है। साथ ही मंडी की आवक प्रभावित हो रही है। मंडी में गुड़ आएगा तो मंडी शुल्क के अलावा आढ़त देनी होगी। इसकी शिकायत मंडी सचिव को गई है लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। राजेश कुमार, अध्यक्ष मंडी व्यापार मंडल शामली

अधिकारी बने हैं इस खेल से अनभिज्ञ
 शामली मंडी के चेयरमैन एसडीएम सदर सुरजीत सिंह ने बताया कि गुड़ के अवैध कारोबार  की उन्हें जानकारी नहीं है, वह इस संबध में मंडी समिति के सचिव से जानकारी कराकर गुड़ शक्कर का अवैध कारोबार करने वालो के खिलाफ कार्रवाई कराएंगे।

मुजफ्फरनगर में तो मंडी से ही हो रहा खेल
 मुजफ्फरनगर। मुजफ्फरनगर में कूकड़ा में स्थित नवीन गुड़ मंडी एशिया की सबसे बड़ी गुड़ मंड़ी है। यहां मंडी शुल्क की चोरी के खेल में मंडी समिति के अधिकारी भी शामिल हैं। बड़े ट्रक में 150 क्विंटल गुड़ लादा जाता है, जबकि गेट पास 100 क्विंटल का लेकर शुल्क जमा कराया जाता है। बाकी 50 क्विंटल गुड़ बिना मंड़ी शुल्क के बाहर भेजा जाता है। मोरना, पुरकाजी, छपार, रोहाना, चरथावल, शाहपुर, बुढ़ाना, रतनपुरी, खतौली, जानसठ क्षेत्रों में सैकड़ों की संख्या में कोल्हू चल गए हैं।

इसके बाद भी गुड़ मंडी में रोजाना करीब आठ से दस हजार मन गुड़ की ही आवक होती है, बाकी गुड़ अवैध रुप से मंडी शुल्क की चोरी कर बेचा जा रहा है। यहां से अहमदाबाद, जयपुर, अलवर, पानीपत, सोनीपत के अलावा पंजाब की मंडियों में गुड़ बेचा जाता है। बाहरी व्यापारी भी यहां के कोल्हूओं से गुड़ खरीदकर बाहर के प्रांत की मंडियों में बेचते है। मंडी में गुड़ लाने पर प्रति कुंतल दो रुपये मंडी शुल्क और 50 पैसे विकास सेस देना पड़ता है।

राजस्थान के व्यापारी कर रहे कोल्हू से सीधे खरीद
बिजनौर। चीनी मिले अभी 15-20 दिन बाद गन्ना पेराई शुरू करेंगी, लेकिन पावर कोल्हू पर पेराई शुरू हो चुकी है। इस बार राजस्थान के व्यापारियों ने कोल्हू संचालकों से सीधे संपर्क कर  गुड़ खरीदना शुरू कर दिया है। वे  गुड़ का ज्यादा रेट देने का वादा कर रहे हैं। आगे रेट बढ़ भी सकता है। कोल्हू मालिक का मंडी तक गुड़ लाने ले जाने का खर्च बचता है और मंडी शुल्क भी देना नहीं पड़ रहा। पहले राजस्थान के व्यापारी मंडी से गुड़ खरीदते थे। कोल्हू मालिकों को गुड़ की कीमत तो अधिक मिल रही है लेकिन मंडी शुल्क की चोरी होने से शासन को चूना लग रहा है। हल्दौर, पैजनियां, किंकर खजूरी क्षेत्र में करीब 200 पावर कोल्हू संचालित हैं।

किसानों की सस्ता गन्ना बेचने की अपनी मजबूरी
बिजनौर। कोल्हू संचालक किसानों से 250-270 रुपये प्रति क्विंटल के रेट पर गन्ना खरीद रहे हैं। महेंद्र, सरजीत, ब्रजपाल, हरेंद्र आदि किसानों का कहना है कि इस भाव में किसानों की उत्पादन लागत भी नहीं निकल रही है, लेकिन किसान को पैसे की जरूरत है। किसानों को गेहूं की फसल की बुआई के लिए खेत खाली करना है।

चांदपुर मंडी को मिलता है सालाना दो करोड़ का राजस्व          
चांदपुर। लड्डू गुड़ से अपनी पहचान बनाए चांदपुर गुड़ मंडी में भारी मात्रा में किसान गुड़ लेकर आने शुरू हो गए हैं। गुड़ व्यापार से मंडी को सालाना दो करोड़ से अधिक का राजस्व प्राप्त होता है। चांदपुर क्षेत्र में ही लड्डू के रूप में गुड़ तैयार किया जाता है। मंडी में करीब 25 गुड़ आढ़ती हैं। इसमें से करीब एक दर्जन आढ़ती किसानों से गुड़ लेकर झारखंड, बिहार, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, बंगाल, पंजाब आदि दूसरे राज्यों में  भेजते हैं। कृषि उत्पादन मंडी समिति सचिव अनिल कुमार त्यागी ने बताया कि मंडी में किसान गुड़ लेकर आ रहे हैं। करीब तीन हजार क्विंटल प्रतिदिन गुड़ आ रहा है। मंडी में नियमानुसार बोली लगाकर किसानों का गुड़ बिकता है। इससे करीब डेढ़ लाख से दो लाख रुपये प्रतिदिन राजस्व वसूली होती है।

मंडी में बहुत कम है आवक
मेरठ। जनपद में इस बार कोल्हुओं की भरमार है। किसान खेतों में गेहूं की बुवाई के लिए गन्ने को सीधे कोल्हू पर डाल रहे हैं। लाखों का गुड़ उत्पादन हो रहा है लेकिन सरकार को राजस्व नहीं मिल रहा है। नवीन मंडी में गुड़ की आवक शून्य के बराबर है। कुछ व्यापारी सीधे कोल्हू से गुड़ उठाकर हरियाणा आदि प्रदेशों मेें भेज रहे हैं। मंडी समिति सचिव नरेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि 10-12 दिन से मंडी में कुछ गुड़ की आवक शुरू हुई है। मंडी शुल्क चोरी करके खुले बाजार में और दूसरे प्रदेश को भेजे जा रहे गुड़ को पकड़ा भी गया है। मंडी शुल्क और जुर्माना वसूला गया है।  
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