सहारनपुर। स्वास्थ्य के प्रति जागरूक हुए जनपद वासियों में टेरिस गॉर्डन का क्रेज बढ़ रहा है। वह जैविक फलों और सब्जियों का उत्पादन अपने घर की छतों पर बनाए गॉर्डन में ही कर रहे हैं, जो सेहत के लिए लाभकारी होने के साथ ही सस्ती भी पड़ती हैं।
कोरोना के प्रकोप के बाद से लोग स्वास्थ्य के प्रति अधिक जागरूक हो रहे हैंं। इसके चलते कई लोग अपने घरों की छत पर रोजमर्रा की जरूरत के लिए पोषण वाटिका स्थापित कर जैविक सब्जियां पैदा कर रहे हैं। छतों पर अंजीर, केला, नींबू, आंवला, अमरूद, किन्नू, चीकू और सब्जियों में टमाटर, कद्दू, भिंडी, शिमला मिर्च, मूली, गाजर, बैंगन आदि उगा रहे हैं। इनमें रासायनिक खाद की बजाए वर्मी कंपोस्ट, गोबर की खाद और किचन वेस्ट से बनी खाद दी जाती है। इसके साथ ही रोगों और कीटों से बचाव के लिए नीम ऑयल आदि का प्रयोग किया जाता है। वहीं, मकानों का नक्शा तैयार करने वाले राजीव गोयल का कहना है कि अब छोटे मकानों में भी टेरिस किचन गॉर्डन की मांग की जाती है। उसी हिसाब से नक्शा तैयार किया जाता है।
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बोलीं उत्पादक
कोरोना काल में टेरिस किचन गॉर्डन शुरू किया था। इसमें अंजीर, चीकू, किन्नू, अमरूद, आम के पौधे लगा रखे हैं। इससे लगातार फल मिल रहे हैं। टमाटर कद्दू, भिंडी, बैंगन, रंगीन शिमला मिर्च, करेला आदि सब्जियां उगा रखी हैं। इसमें सिर्फ किचन वेस्ट से बनी खाद का ही प्रयोग कर रहे हैं। - नमिता कश्यप, निवासी साहिबजी नगर
पिछले कई वर्षों से अपने टेरिस किचन गॉर्डन में पैदा हुईं सब्जियों का घर में उपयोग कर रहे हैं। इसमें भिंडी, बैंगन, खीरा, करेला, तुरई, पालक, धनिया, मेथी, टमाटर, हरी मिर्च, पुदीना आदि उगाते हैं। सब्जियों को पोषण देने के लिए वर्मी कंपोस्ट खाद का प्रयोग होता हैं। रोगों एवं कीटों से बचाव को नीम ऑयल का इस्तेमाल करते हैं। - दीपिका मित्तल, निवासी अहमदबाग।