दुख की घड़ी काटणी पड़े, जिस पर बीत्ते, उसे ही सहणी पड़े। कहणे की भी हिम्मत नहीं रहत्ती। सचिन और गौरव का आंखों के सामने से बेरहमी से कत्ल कर दिया था। भीड़ के आगे मैं बेबस हो गया। बेटों की जान नहीं बचा पाया।’कवाल कांड में अपने इकलौते बेटे गौरव को खो चुके पिता रविंद्र सिंह अपना दर्द बयां करते हुए भावुक हो गए। मलिकपुरा के परिवार को उम्मीद है कि नृशंस तरीके से ममेरे भाइयों की हत्या के केस में हमें अदालत से इंसाफ मिलेगा।
करीब साढ़े पांच साल पहले का भयावह मंजर मलिकपुरा के परिवार को नहीं भूलता। कोर्ट की लंबी सुनवाई के बाद कवाल की घटना में ममेरे भाइयों सचिन और गौरव की हत्या के केस में बुधवार यानि आज अदालत के आने वाले फैसले का परिजनों को इंतजार है। घर के दो जवान बेटों के कत्ल से मां, पिता और बहनें पूरी तरह टूट गई थीं। फिलहाल गौरव के पिता रविंद्र सिंह अपनी पत्नी सुरेश और दो बेटियों के साथ शहर के सरकुलर रोड स्थित एक कॉलोनी में रह रहे है।
’अमर उजाला’ से बातचीत में घर का हर शख्स उस निर्मम हत्याकांड को याद कर सिहर उठता है। रविंद्र सिंह ने बताया कि 26 अगस्त 2013 की बात है। गांव कवाल में मुजस्सिम की बाइक में कॉलेज से लौटते गौरव की साइकिल भिड़ गई थी। इसी बात को लेकर मुजस्सिम ने उससे कहासुनी की। ग्रामीणों ने समझा बुझा कर मामला शांत कर दिया।
रविंद्र सिंह ने बताया कि मेरा बेटा गौरव नंगला मंदौड़ के भारतीय इंटर कॉलेज में इंटर का छात्र था। वह हर दिन कवाल के रास्ते अपने गांव मलिकपुरा आता-जाता था। उसने अपने साथ हुई घटना ममेरे भाई सचिन को बताई। सचिन अपने पिता बिशन सिंह के साथ मलिकपुरा में ही खेती-बाड़ी करता था। अगले दिन 27 अगस्त को गौरव के साथ सचिन नंगला मंदौड़ से कवाल होते हुए गांव आ रहे थे। जैसे ही वे कवाल पहुंचे तो उनसे मुजस्सिम पक्ष ने मारपीट की, तभी हमें मलिकपुरा में सूचना मिली कि सचिन और गौरव को एक समुदाय विशेष की भीड़ ने घेर रखा है।
जैसे ही मैं अपने परिजनों के साथ मौके पर पहुंचा तो देखा कि आरोपी हाथों में धारदार हथियार, पत्थर और सरिये लिए सचिन और गौरव को बेरहमी से मार रहे थे। भीड़ के आगे हमारी एक न चली और अपनी आंखों के सामने ही उन्हें नृशंस तरीके से कत्ल होते देखा। आज भी घटना को याद कर रूह कांपती है। दो बेटों की मौत का दुख सहने की हिम्मत नहीं बची थी। जैसे-तैसे परिवार को संभाला। गौरव की मां सुरेश सदमे से अभी तक उबर नहीं पाई है।
हत्याकांड के जिक्र पर उनके गले में शब्द सूख जाते है। सुरेश बताती है कि बड़े बेटे नितिन की रेल हादसे में मौत के बाद गौरव ही घर का सहारा था। वह पढ़ लिख कर नौकरी करना चाहता था। उसकी हत्या के बाद दो बेटियों नीति और शैली के साथ ही दर्द बांट लेती हूं। सरकार की अनुकंपा पर गौरव की छोटी बहन शैली को मृतक आश्रित वर्ग में जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान में क्लर्क की नौकरी मिली है।
नीति की शादी हो चुकी है। शैली कहती है कि निहत्थे भाईयों को निर्दयता से मार दिया गया था। ताउम्र यह दु:ख नहीं भूलेगा। भगवान किसी के साथ ऐसी अनहोनी न करें। परिजनों को उम्मीद है कि अदालत से इंसाफ मिलेगा। बता दें कि कवाल हत्याकांड में सचिव और गौरव के अलावा दूसरे पक्ष के कवाल निवासी शाहनवाज पुत्र सलीम की भी मौत हुई थी।
बेटे सचिन को याद कर सुबकने लगी मां मुनेश
जानसठ। कवाल के मजरे मलिकपुरा में गौरव और सचिन के घर कोर्ट के फैसले की सुगबुगाहट है। सचिन के पिता बिशन सिंह और मां मुनेश खेती किसानी में व्यस्त रहते हैं। सचिन का छोटा भाई राहुल पिता का हाथ बंटाता है। बिशन कहते हैं कि अब घटना के बारे में क्या बताएं? हमारे तो घर ही खुशियां की छिन गई। सचिन के जिम्मे ही खेती-बाड़ी थी।
उसकी शादी पुरबालियान की स्वाति से की थी। जब उसकी हत्या हुई, उसका बेटा गगन ढाई साल का था। मां मुनेश सचिन और गौरव को याद कर सुबकने लगती हैं। बिशन कहते हैं कि ममेरे भाईयों के कातिलों को कड़ी से कड़ी सजा मिले। बताते चले कि सचिन की पत्नी स्वाति को भी मृतक आश्रित में कलेक्ट्रेट में नौकरी करती है। बहन रीतू की शादी हो चुकी है।