जानसठ के मलिकपुरा गांव में रविवार को ममेरे भाइयों सचिन और गौरव की तीसरी पुण्यतिथि मनाई गई। केंद्रीय राज्यमंत्री डॉ संजीव बालियान एवं भाजपा नेता श्रद्धांजलि देने गांव पहुंचे। पुण्यतिथि को लेकर गांव कवाल में भारी पुलिस एवं पीएसी बल तैनात रहा।
कवाल में 27 अगस्त 2013 को गांव मलिकपुरा के ममेरे भाइयों सचिन और गौरव की हत्या कर दी गई थी। रविवार को गांव मलिकपुरा में दोनों ममेरे भाइयों की तीसरी पुण्यतिथि मनाई गई। सुबह हवन यज्ञ आयोजित किया गया, जिसमें केंद्रीय राज्यमंत्री डॉ. संजीव बालियान भी परिजनों के साथ हवन, यज्ञ में शामिल हुए और आहुति दी।
इसके बाद केंद्रीय राज्यमंत्री एवं भाजपा नेताओं ने सचिन और गौरव के चित्रों पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। इस दौरान डॉ. संजीव बालियान ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि वह अपने मृतक भाइयों को याद करने आए हैं। हर वर्ष उनकी पुण्यतिथि में आते रहेंगे।
श्रद्धांजलि देने वालों में भाजपा जिलाध्यक्ष रुपेंद्र सैनी, पूर्व जिलाध्यक्ष यशपाल पंवार, डॉ वीरपाल निर्वाल, उमेश मलिक, पूर्व प्रमुख वीरेंद्र सिंह, नजर सिंह, चौधरी उधम सिंह, डॉ दिनेश धीमान, प्रद्युम्न, खतौली नगराध्यक्ष प्रशांत देशवाल, मीरापुर चेयरमैन नवीन सैनी आदि शामिल रहे।
पुण्यतिथि को लेकर सुबह गांव कवाल में भारी पुलिस एवं पीएसी बल तैनात कर दिया गया था। एसपी देहात राकेश कुमार जौली, एसडीएम उमेश कुमार मिश्र, सीओ सूक्ष्म प्रकाश, सीओ सुनील कुमार, तहसीलदार खतौली सतीश कुमार कुशवाहा भी पुलिस बल के साथ मलिकपुरा में मौजूद रहे।
पोते को देखने के लिए दादी की आंखें तरसी
मृतक सचिन की पत्नी स्वाति पुण्यतिथि में खुद भी नहीं आई और न ही अपने बेटे गगन को भेजा। ससुराल से भी पुण्यतिथि में कोई नहीं आया। मृतक सचिन की मां मुनेश को उम्मीद थी कि पुण्यतिथि में पोता जरूर आएगा। मुनेश ने बताया कि एक साल से अधिक समय पोते को देखे हो गया है। दादा बिशन सिंह पुरबालियान में अपने पोते से मिलने पुत्रवधू के मायके गए थे। पुत्रवधू ने दादा को पोते से मिलने तक नहीं दिया। मुनेश का कहना था कि पोते की बहुत याद आती है। उसको देखने के लिए आंखें तरस गई हैं।
हमें शासन-प्रशासन से इंसाफ नहीं मिला
कवाल गांव में मृतक शाहनवाज के पिता सलीम घर पर नहीं थे। उनके दूसरे बेटे शहजाद से बात हुई। उसको सरकार ने बेलदार की नौकरी दी है। शहजाद का कहना है कि उनको शासन-प्रशासन से कोई इंसाफ नहीं मिला है। सचिन और गौरव की हत्या में बेकसूर भाइयों को फंसाकर जेल भेजा गया। बेकसूर होने के सबूत भी पुलिस को दिए गए। इसके बावजूद उनको फंसा दिया गया। तीन साल बीत गए, अभी तक एक की भी जमानत नहीं हो सकी है। परिवार के सभी लोग दुखी रहते हैं। अब हमारे परिवार को इंसाफ मिलने की उम्मीद भी नहीं लग रही है।