घासीपुरा कांड पर डीएम से वार्ता करते भाजपाई।
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घासीपुरा कांड को लेकर पंचायत की सुगबुगाहट हो रही है। पुलिस प्रशासन पंचायत को विफल करने की कोशिश में जुटा हुआ है। बुधवार देर शाम भाजपाई डीएम डीके सिंह से उनके आवास पर मिले। भाजपाइयों ने कोतवाल के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने और मामले की सीबीआई से जांच कराने की मांग की है।
घासीपुरा के ट्रिपल मर्डर मामले में पुलिस की खिलाफत बढ़ती जा रही है। जाट बिरादरी के लोगों ने प्रभारी निरीक्षक अमरेश सिंह बघेल के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने और मामले की जांच सीबीआई से कराने को लेकर तीन अक्तूबर को मंसूरपुर में पंचायत का ऐलान कर रखा है। भाजपा और भाकियू भी इस मुद्दे पर मुखर हैं। गांवों में पंचायत को लेकर सुगबुगाहट है। खुफिया विभाग की टीमें पंचायत को लेकर सक्रिय हैं।
पुलिस प्रशासन के अधिकारी पंचायत को टालने की कोशिशों में जुटे हुए हैं। बुधवार देर शाम भाजपाइयों ने आवास पर पहुंचकर डीएम डीके सिंह से मुलाकात की। जिलाध्यक्ष रुपेद्र सैनी ने डीएम को बताया कि कोतवाल बघेल के खिलाफ जिले में भारी रोष है। कोतवाल के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की जाए और मामले की जांच सीबीआई से कराई जाए। डीएम ने मामले में उचित कार्रवाई का आश्वासन भाजपा नेताओं को दिया है। इस दौरान नितिन मलिक, धर्मबीर बालियान, हरीश अहलावत, शरद शर्मा, उमेश मलिक, संजय अग्रवाल आदि मौजूद रहे।
कारबाईन और पिस्टल को कहते थे सीपी
घासीपुरा कांड में मारे गए बदमाश मरने से कुछ देर पहले वॉट्सअप पर चैटिंग कर रहे थे। चैटिंग में सीपी को ठिकाने लगाने का जिक्र कई बार किया गया है। पुलिस इस शब्द का राज तलाशने में लगी थी। मृतकों का एक साथी कारागार में बंद है। उसी ने इस रहस्य से पर्दा उठाया है।
पुलिस ने उससे सीपी के बारे में गहन पूछताछ की है। पुलिस के मुताबिक बदमाश ने इस शब्द को डीकोड करने में मदद की है। उसने बताया कि उनके बीच सी का मतलब कारबाइन और पी का मतलब पिस्टल से है। वह आपस में सीधे हथियारों की बात न कर कोडवर्ड में बात करते थे। पुलिस की जांच अब इस ओर मुड़ी है कि कारबाइन और पिस्टल के बारे में बदमाश किस तरह की चैटिंग कर रहे थे। यह हथियार कहां से आने या जाने थे, या फिर मंसूरपुर में ही उन्हें रखा गया है। सीपी का राज खुलने के बाद पुलिस अब हथियारों की खोज में जुट गई है।