शुक्रताल में कार्तिक गंगा स्नान मेले में वीतराग स्वामी कल्याण देव और देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरु। (फाइल फोटो)
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मुजफ्फरनगर/मोरना। कार्तिक पूर्णिमा गंगा स्नान का पुण्य देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू को शुकतीर्थ खींच लाया था। निष्काम संत स्वामी कल्याण देव की संतई से अभिभूत पंडित नेहरू उनके आग्रह को टाल नहीं पाए और 26 नवंबर 1958 को शुक्रताल आए थे। गंगा तट पर हुई किसान सभा में नेहरू ने देश को अन्न में आत्मनिर्भर बनाने का संकल्प कराया था।
पौराणिक शुकतीर्थ में कार्तिक गंगा स्नान मेले से अमिट यादें जुड़ी हैं। वीतराग स्वामी कल्याण देव के बुलावे पर 58 साल पहले आए पंडित नेहरू ने शुकतीर्थ में गंगा दर्शन किया था। मेला ग्राउंड में लाखों किसानों की सभा बुलाई गई। सभा के साक्षी वैद्य विशंभर सिंह बताते हैं कि गंगा किनारे मंच पर शिक्षा ऋषि के साथ पंडित जवाहरलाल नेहरू विराजमान थे। उस उक्त देश में अन्न का अभाव था।
प्रधानमंत्री ने किसानों से अन्न पैदावार में वृद्धि कर भारत को आत्मनिर्भर बनाने का संकल्प कराया था। उन्होंने स्वामी जी को उत्तर प्रदेश का गांधी संबोधित करते हुए उनकी नि:स्वार्थ सेवाओं की प्रशंसा की थी। यहां के मेले में यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री डॉ संपूर्णानंद ने कई बार पूर्णिमा पर तीर्थ की यात्रा की। जब वह सूबे के मुख्यमंत्री थे, तो गंगा मेले में बिजली की कोई व्यवस्था नहीं थी।
श्रद्धालुओं की दिक्कतें देख उन्हीं के निर्देेश पर मुजफ्फरनगर से 28 किमी दूर बिजली की लाइन बिछाई गई।इटली से आए बिजली के लोहे के खंभे रेलवे वैगनों से देहरादून ले जाए जा रहे थे। डॉ संपूर्णानंद की पहल पर एक वैगन से तीर्थ में बिजली आपूर्ति के लिए मुजफ्फरनगर रेलवे स्टेशन पर खंभे उतार दिए गए थे। कर्मयोगी संत के बुलावे पर देश के शीर्ष राजनीतिज्ञ, संत-महात्मा, भागवत कथा व्यास आध्यात्मिक शांति के लिए शुकतीर्थ पहुंचते थे।