बुधवार को चंद्रग्रहण लगा। दोपहर बाद सभी मंदिरों के कपाट बंद कर दिए गए। लोगों ने चंद्रग्रहण में दान देकर पुण्य कमाया। शुक्रताल और गंगा बैराज पर गंगा में भक्तों ने स्नान किया। इस दुर्लभ चंद्रग्रहण को दिखाने के लिए शिक्षण संस्थाओं में व्यवस्था की गई थी।
बुधवार को करीब 150 साल बाद हुए ब्लड सुपरब्लू मून चंद्रग्रहण के चलते शहर के मंदिरों के कपाट को दोपहर में ही बंद कर दिया गया था। सूतक लग जाने के कारण मंदिरों के द्वार नहीं खोले गए। चंद्रग्रहण को लेकर लोगों में उत्साह भी नजर आया। लोगों में इसको लेकर धार्मिक चर्चाएं भी होती रही।
ये चांद नंगी आंखों से लोगों ने देखा। इस चांद के बारे में कहा जाता है कि यह चौदहवीं के चांद से भी ज्यादा चमकीला होता है। सवेरे से ही चंद्रग्रहण की हलचल शुरू हो गई थी। शहर के शिव चौक पर शिवमूर्ति, बालाजी चौक पर भगवान बालाजी मंदिर सहित सभी मंदिरों के कपाट बंद रहे। सूतक लग जाने के कारण ऐसा किया गया।
वहीं शाम को आसमान में इस साल का पहला चंद्रग्रहण दिखाई दिया, ये चंद्रग्रहण बेहद खास रहा। ऐसा इसलिए है क्योंकि इस बार ब्लडमून और ब्लूमून या सुपरमून एक साथ दिखाई दिए। धार्मिक और वैज्ञानिक मान्यताओं के अनुसार यह सिर्फ चंद्रग्रहण ही नहीं बल्कि पूर्ण चंद्रग्रहण था।
यह शाम 5.58 बजे से शुरू होकर रात 8.41 बजे तक 77 मिनट के लिए दिखाई दिया। चंद्रग्रहण के दौरान लोग धार्मिक अनुष्ठान में लगे रहे। चंद्रग्रहण होने के बाद मंदिरों के कपाट खुले गए। साफ सफाई करके पूजा अर्चना की गई। लोगों ने गंगा में स्नान कर दान देकर पुण्य अर्जित किया। उधर, एसडी पब्लिक स्कूल में बच्चों को चंद्रग्रहण दिखाने की व्यवस्था की गई थी।
चंद्रग्रहण से मंदिरों के कपाट रहे बंद
पुरकाजी। चंद्रग्रहण को लेकर बुधवार सवेरे से ही कस्बे के मंदिरों के कपाट बंद रहे, जिसके चलते मंदिरों में पूजा-अर्चना का कार्य नहीं हो पाया। इसके अलावा सांय के समय चंद्रग्रहण शुरू होते ही खाने के समान आदि की दुकानों पर भी ग्राहकों की आवाजाही कम हो गई।
लोग पूजा-अर्चना करते रहे। श्रीबालाजी धाम के संस्थापक गुरुजी पं घनश्याम दास शर्मा ने बताया कि सवेरे सवा आठ बजे सूतक लग जाने के कारण मंदिरों के कपाट बंद कर दिए गए और सांय के वक्त होने वाली आरती भी नहीं की गई है।