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दिलचस्प किस्सा: ...जब 'चौधरी साहब' की परख ने पलट दी थी नंदराम की किस्मत, सादगी देख बना दिया था विधायक

Fri, 09 Feb 2024 02:10 PM IST
कपिल kapil अमर उजाला ब्यूरो, मुजफ्फरनगर

सार

Bharat Ratna Award 2024 : पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह को भारत रत्न देने का एलान हुआ तो उनसे जुड़ा एक दिलचस्प किस्सा भी सामने आया है। 'चौधरी साहब' ने नंदराम की सादगी देखकर उन्हें दो बार एमएलए बनाया था। पढ़िए पूरी कहानी... 

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नंदराम। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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जनसभाओं में भजनोपदेशक अनुसूचित जाति के नंदराम की सादगी और सरलता देख पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह ने चरथावल सीट से उन्हें दो बार एमएलए बना दिया था। दो बार विधायक रहें दिवंगत नंदराम के सरल जीवन को देख नेता और जनता सब अचंभित रहते थे। चौधरी चरण सिंह साहब की परख ने उनकी किस्मत पलट दी थी। 

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राजनीति के मंच सजते, तब उनके भजन भी वोटरों को लुभाने का काम करते। बड़े चौधरी की सभाओं व सम्मेलनों में उन्होंने भजन गाए। होली पर उनके गीतों की प्रस्तुति के अंदाज से चौधरी चरणसिंह भी लट्टू हो गए। उनके भजनों से अभिभूत होकर दो बार 1974 और 1977 में टिकट देकर विधायक बनाया। बड़े चौधरी ने खुद उनके लिए क्षेत्र में घूमकर वोट मांगे थे। दोनों बार उनके समर्थकों ने चुनाव का पूरा खर्चा वहन किया। जीवन पर्यंत उन्होंने विधायक के पद की गरिमा को मर्यादा में रहकर ईमानदारी के साथ बरकरार रखा।

उन्होंने एमएलए बनने के बाद भी असूल और सादगी को बरकरार रखा। प्राइवेट बस में सवार होकर वह जनता की समस्या सुनने क्षेत्र में आते थे। पूरे जीवन में दो जोड़ी कपड़े ही उनके पास रहे। लखनऊ चार बाग स्टेशन से उतरकर पैदल ही विधायक निवास जाते थे। विधायक होते हुए भी जहां सस्ता भोजन मिलता था, वही ग्रहण कर लेने में काई संकोच नहीं था।

प्रचार के दौरान नंदराम के घर किया था भोजन
चौधरी साहब चुनाव के दौरान अपने समर्थकों संग गांव-गलियारों में पैदल घूमकर प्रचार करते थे। उस जमाने में वोटरों में शराब या घूसखोरी की लत नहीं थी। 1977 में बरला में चुनाव की मीटिंग में चौधरी साहब ने नंदराम को बुलाया और कहा कि आज तुम्हारे यहां भोजन करेंगे। चार घंटे उनके गांव कुतुबपुर में ठहरकर अपनी पत्नी गायत्री देवी के संग बड़े चाव से गरीब के कच्चे मकान में भोजन किया। भले ही नंदराम आज हमारे बीच न हो पर उनकी सादगी, ईमानदारी की मिसाल आज भी महंगे व तड़क फड़क वाले चुनाव के दौरान जरूर चौपालों पर सुनने को मिलती हैं। उन्होंने अंतिम वक्त तक सादगी का साथ नहीं छोड़ा।

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एक उद्योगपति ने नंदराम को रुपये का दिया था लालच
एक बार राज्यसभा चुनाव में एक उद्योगपति ने दो लाख रुपये का लालच देकर उन्हें खरीदने का प्रयास किया लेकिन, उन्होंने टका सा जबाब देकर वापस भेज दिया। जब यह बात नंदराम ने चौधरी साहब को बताई तो उन्होंने नंदराम की ईमानदारी परखने को कहा कि गरीब थे, रुपये ले लेते। इस पर नंदराम ने कहा कि गरीब होना अपराध नहीं है।

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