पहाड़ों पर बारिश के बाद नदियों में आया उफान।
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बाढ़ से सुरक्षा को लेकर जिला प्रशासन प्रतिवर्ष बड़े-बड़े दावे करता है। बाढ़ के आने के बाद सारे दावे धरे रह जाते हैं। इस समय आधा दर्जन गांव बाढ़ के पानी की चपेट में हैं। इन गांवों के लोगों के सामने पशु चारे का संकट गहराया हुआ है। इसके अलावा कई और समस्याएं हैं, लेकिन सरकारी अमला नदारद है। हालांकि जिला प्रशासन का दावा है कि सभी बाढ़ चौकियां काम कर रही हैं।
पहाड़ों पर लगातार वर्षा से गंगा का जलस्तर बढ़ा है। पहाड़ी नदियों में अधिक पानी आने से खादर क्षेत्र में कुछ गांवों में पानी भर गया है। इनमें महाराजनगर, मजलिसपुर तौफीर आदि आधा दर्जन गांव शामिल हैं। सोलानी नदी में अधिक पानी आने से ये हालात पैदा हुए हैं। जिला प्रशासन की मानें तो बाढ़ की सभी तैयारियां पूरी हैं।
कुल 21 नाव तैयार की गई हैं। इनमें चार बड़ी और 17 छोटी हैं। जिले में दस बाढ़ चौकियां बनाई गई हैं, जिन पर अधिकारी और कर्मचारी तैनात किए गए हैं। किसी भी स्थिति से निपटने के लिए सभी तैयारियां की गई हैं। जिले के 120 गांवों में मॉक ड्रिल एवं बाढ़ से बचाव का प्रशिक्षण दिया गया है। ग्रामीणों को बचाव के लिए उपकरण भी उपलब्ध कराए गए हैं, जो उपकरण दिए गए हैं
इनमें सर्च लाइट, मेगाफोन, फोल्डेबल स्ट्रेचर, सेेफ्टी हेलमेट आदि हैं। इन सब परिस्थितियों के बाद भी उन गांवों में कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए, जो बाढ़ से प्रभावित हैं। इन गांवों के लोगों का आरोप है कि पशुओं के लिए चारे का संकट उनके सामने है। पीने के पानी की समस्या भी है। चिकित्सकों की टीम नियमित नहीं आ रही है। डीएम डीके सिंह के अनुसार बाढ़ की समस्त तैयारियां पूरी हैं, जो गांव प्रभावित हैं उन सभी में प्रशासनिक अमला जुटा हुआ है। सभी गांवों में टोल फ्री नंबर की जानकारी दी गई है।