स्वास्थ्य विभाग में पांच और चिकित्सकों ने पीजी कोर्स करने के लिए छुट्टी मांगी है। ऐेसे में विभाग की धड़कनें तेज हो गई हैं। चूंकि चिकित्सकों के मामले में जिले का पहले ही बुरा हाल है। लगातार घट रही चिकित्सकों की संख्या से इलाज व्यवस्था बेपटरी हो रही है।
जनपद में स्वास्थ्य विभाग में केवल 59 चिकित्सक तैनात हैं। इनमें से भी पांच चिकित्सकों ने पीजी कोर्स के लिए विभाग में छुट्टी के लिए अर्जी लगाई है। चिकित्सकों की कमी से जूझ रहे विभाग की सिरदर्दी बढ़ गई है। चूंकि गर्मी में बीमारियां भी बढ़ती हैं और मरीज भी बढ़ जाते हैं। अकेले जिला अस्पताल में नहीं, सीएचसी, पीएचसी स्तर पर मरीजों में इजाफा होता है।
सबसे अधिक चिंता यह है कि पीएचसी-सीएचसी से मरीजों को जिले में रेफर किया जाता है। अस्पताल में कुल 12 चिकित्सक तैनात हैं। सीएमओ डॉ पीएस मिश्रा ने बताया कि पहले ही कई चिकित्सक पीजी के लिए बाहर हैं। ऐसे में पांच अन्य डॉक्टरों ने भी पीजी के लिए छुट्टी मांगी है। विभाग पहले स्थिति का आंकलन कर रहा है, उसके बाद ही अगला कदम उठाया जाएगा।
वर्तमान में 52 हजार पर एक चिकित्सक
मुजफ्फरनगर। यदि बात चिकित्सकों और आबादी की करें तो स्थिति बेहद खराब है। 59 चिकित्सकों को कुल आबादी से भाग करें तो 52 हजार लोगों पर एक ही चिकित्सक तैनात है। यदि पांच और चिकित्सकों की छुट्टी मंजूर होती है तो 54 चिकित्सक रह जाएंगे। उसके बाद 57 हजार से अधिक लोगों पर एक ही डॉक्टर तैनात होगा, जो भयावह स्थिति है।
10 हजार पर एक डॉक्टर के मानक
मुजफ्फरनगर। मानकों को परखा जाए तो 10 हजार लोगों पर एक चिकित्सक तैनात होता है, जबकि जनपद में एक ही चिकित्सक चार से पांच चिकित्सक का काम देख रहा है। वहीं, महिला अस्पताल में भी चिकित्सकों की कमी है। जिसके चलते विभाग की परेशानियां बढ़ गई है।