सुप्रीम कोर्ट के एनसीआर में पटाखों की बिक्री पर रोक लगाने के बाद शहर में लगने वाले पटाखा बाजार तो नहीं लगे और न ही किसी दुकान पर खुलेआम पटाखों की बिक्री हुई। इसके बाद भी दीपावली पर शाम ढलते ही बच्चों ने जमकर पटाखे छोड़े। दिन ढलने के बाद रातभर पटाखों की आवाज गूंजती रही।
एनसीआर में प्रदूषण की समस्या को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने पटाखों की बिक्री के लिए लाइसेंस का प्रावधान किया था। शहर में काफी संख्या में व्यापारियों ने लाइसेंस बनवाए थे। सभी पटाखा व्यापारी बड़ी मात्रा में पटाखे ले आए। इस बीच दीपावली से आठ दिन पहले पटाखों की बिक्री पर रोक लगा दी गई।
पुलिस ने गोदामों को सील कर दिया और गली मोहल्लों के दुकानदारों के पटाखे भी जब्त कर लिए। पुलिस और प्रशासन को यह उम्मीद थी कि दीपावली के दिन पटाखे नहीं छूट पाएंगे। दीपावली पर जैसे ही शाम ढली तो बच्चों ने पटाखे निकाल लिए और छुटाने शुरू कर दिए। दीपावली पूजन के बाद तो शहर पटाखों की आवाज से गूंज उठा। रात्रि दो बजे तक आतिशबाजी होती रही।
सील कर दी गई थी पटाखों की दुकानें
मुजफ्फरनगर। सिटी मजिस्ट्रेट गौरव मिश्रा की देखरेख में पुलिस ने शहर के सभी पटाखा व्यापारियों की दुकानें सील कर दी थी। पुलिस का यह प्रयास था कि पटाखों की बिक्री न हो। जब पटाखे बिकेंगे नहीं तो छूटेंगे भी नहीं, लेकिन गली मोहल्लों में बड़े ही सिस्टम से पटाखे बिके।
पटाखा व्यापारी मांगते रहे मुआवजा
मुजफ्फरनगर। दीपावली से दो दिन पहले तक पटाखा व्यापारी कलक्ट्रेट में धरना प्रदर्शन करते रहे। इन लोगों ने राज्यपाल, मुख्यमंत्री से लेकर राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री तक को ज्ञापन भेजा। इन लोगों का यह कहना था कि पटाखे उन्होंने जीएसटी देकर खरीदे हैं। ऐसे में उनके नुकसान की भरपाई कौन करेगा। जब बेचने की अनुमति नहीं देनी थी तो लाइसेंस क्यों बनवाए गए।