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आखिरकार निलंबित हुए लिपिक ओमवीर

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मुजफ्फरनगर। चेयरपर्सन और अधिशासी अधिकारी के बीच चली लंबी लिखा-पढ़ी के बाद आखिरकार पालिका के द्वितीय श्रेणी लिपिक ओमवीर सिंह को निलंबित कर दिया गया। पालिका अध्यक्ष ने तैनाती स्थल पर मौजूद नहीं रहने तथा अनुशासनहीनता के आरोप में लिपिक का निलंबन आदेश जारी कर दिया। उन्हें नगर पालिका इंटर कॉलेज से संबद्ध करने के साथ ही ताकीद किया है कि कॉलेज में उपस्थित रहने पर ही उन्हें जीवन निर्वाह भत्ता कॉलेज अधिष्ठान से दिया जाए।
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16 अक्तूबर को ईओ विनय कुमार मणि त्रिपाठी ने नगर पालिका इंटर कॉलेज में तैनात द्वितीय श्रेणी लिपिक ओमवीर सिंह को जनगणना सहायक के पद पर तैनात किया था। इस पर चेयरपर्सन अंजू अग्रवाल ने 21 अक्तूबर को जारी आदेश में कहा कि ओमवीर सिंह ने 2011 की जनगणना में सही ढंग से कार्य नहीं किया था। इसलिए उन्हें 2021 की जनगणना के महत्वपूर्ण कार्य में लगाया जाना उचित नहीं है। जनरेटर्स के कमरों के निर्माण की पत्रावली को लेकर भी ओमवीर विवादित रहे हैं। चेयरपर्सन ने अपने आदेश में यह भी कहा था कि ईओ ने बिना उनसे लिखित अथवा मौखिक अनुमति लिए लिपिक का स्थानांतरण किया है। इसलिए उनके आदेश को निरस्त किया जाता है।
इसके जवाब में ईओ ने भी चेयरपर्सन को 22 अक्तूबर को पत्र लिखा। ईओ ने लिखा कि 2011 की जनगणना में ओमवीर सिंह के कार्य को लेकर उन्हें (चेयरपर्सन) को भ्रमित किया गया है। ओमवीर ने अपना कार्य पूर्ण कुशलता से किया था। उनका पटल परिवर्तन एडीएम वित्त एवं राजस्व के आदेश के क्रम में किया गया है। जनगणना 2021 का चार्ज अधिकारी होने के नाते उन्हें अपने चार्ज क्षेत्र के अंतर्गत कर्मचारियों का स्थानांतरण करने के लिए चेयरपर्सन की लिखित एवं मौखिक अनुमति की अनिवार्यता नहीं है। लेकिन चेयरपर्सन ने फिर एक बार पत्र लिखकर लिपिक को अंतिम चेतावनी देते हुए नगर पालिका इंटर कॉलेज में योगदान करने के निर्देश दिए। इसके बावजूद ओमवीर सिंह ने कॉलेज में योगदान नहीं किया। इस पर चेयरपर्सन अंजू अग्रवाल ने अनुशासनहीनता, निर्देशों का पालन नहीं करने तथा तैनाती स्थल पर मौजूद नहीं रहने के आरोप में पांच नवंबर को ओमवीर सिंह के निलंबन आदेश जारी कर दिए।
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चेयरपर्सन को देना पड़ा स्पष्टीकरण
मुजफ्फरनगर। नगर पालिका अध्यक्ष और ईओ के बीच चल रही लिखा पढ़ी के दौरान चेयरपर्सन को अपने अधिकारों की व्याख्या करनी पड़ी। ईओ की ओर से लिखे गए पत्र में चेयरपर्सन के अधिकारों को लेकर सवाल खड़े किए थे। इस पर चेयरपर्सन ने अपने पत्र में स्पष्ट किया कि नगर पालिका अधिनियम 1961 की 70, 74, 75, 76 के परंतुकों द्वारा अध्यक्ष में निहित नगर पालिका के सेवकों की नियुक्ति करने, दंड देने या पदच्युत करने की शक्तियां प्रदत्त हैं। उन्होंने लिपिक के पक्ष में बार-बार पत्र लिखने पर ईओ की भूमिका पर भी सवाल खड़े किए हैं। इस संबंध में ईओ विनय कुमार मणि त्रिपाठी से कई बार संपर्क करने का प्रयास किया गया लेकिन वह उपलब्ध नहीं हो सके।
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