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किसान की आत्महत्या का मामला : शव सड़क पर रखकर ग्रामीणों ने दिया धरना

Sat, 22 Jun 2019 12:44 AM IST
Deepak Kausik अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर
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आत्महत्या करने वाले किसान के घर के बाहर धरना देते किसान। - फोटो : अमर उजाला
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बैंक व तहसील अफसरों की उत्पीड़न से तंग आकर आत्महत्या करने वाले गांव सोंहजनी तगान निवासी वृद्ध किसान का शव आने के बाद ग्रामीणों ने सड़क पर रखकर धरना दे दिया। मौके पर पहुंचे एडीएम प्रशासन, एसपी सिटी व अन्य अफसरों से ग्रामीणों ने फर्जी लोन की जांच कर रिपोर्ट दर्ज करने, किसान की लोन माफी के साथ ही आर्थिक मुआवजे की भी मांग की।
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मंसूरपुर थाना क्षेत्र के गांव सोंहजनी तगान निवासी वृद्ध किसान धनप्रकाश त्यागी (75) पुत्र कालेराम ने विगत 15 जून को बैंक व तहसील अफसरों पर उत्पीड़न करने का आरोप लगाते हुए कीटनाशक पी लिया था। गंभीर हालत में मेरठ मेडिकल में उसका उपचार चल रहा था, जहां बृहस्पतिवार दोपहर उसकी मौत हो गई थी। शुक्रवार शाम करीब तीन बजे मेरठ में पोस्टमार्टम के बाद परिजन उनका शव लेकर घर लौटे।

जहां आक्रोशित ग्रामीण शव गांव में घर के सामने रखकर धरने पर बैठ गए। सूचना पर इंस्पेक्टर संजीव कुमार टीम के साथ गांव में पहुंचे, लेकिन ग्रामीण अफसरों को बुलाने अन्यथा शव लेकर डीएम आवास पर पहुंचकर धरना देने पर अड़ गए। एडीएम प्रशासन अमित कुमार सिंह, एसपी सिटी सतपाल आंतिल, सिटी मजिस्ट्रेट अतुल कुमार, सीओ खतौली आशीष प्रताप सिंह टीम के साथ गांव में पहुंचे और ग्रामीणों से वार्ता की।
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करीब एक घंटे तक चली वार्ता में ग्रामीणों द्वारा दिए गए ज्ञापन के बाद अफसरों ने एडीएम प्रशासन के नेतृत्व में मामले की जांच के लिए टीम गठित किए जाने, जांच पूरी होने तक किसान के घर पर किसी भी बैंक या तहसील अधिकारी के नहीं पहुंचने, किसी तरह की रिकवरी नहीं किए जाने, फर्जी लोन मिलने पर दोषियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज किए जाने का आश्वासन देकर धरना खत्म कराया। इसके बाद शव का गांव के श्मशान घाट पर अंतिम संस्कार कर दिया गया। इस दौरान पूर्व गन्ना समिति चेयरमैन विनोद त्यागी, भाकियू जिला उपाध्यक्ष बिजेंद्र बालियान, रालोद नेता अशोक बालियान, राजेश त्यागी व संजय सिंह समेत बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।

लोन की फाइलों पर किसान के हस्ताक्षरों का होगा मिलान
धनप्रकाश त्यागी की मौत के बाद धरना देने वाले ग्रामीणों के निशाने पर बैंक अफसर और बैंकों की कार्यप्रणाली ही रही। एडीएम प्रशासन अमित कुमार सिंह के साथ हुई वार्ता में ग्रामीणों ने बताया कि वृद्ध किसान पर एक ही समय में चार बैंकों का लोन बताया जा रहा है। इनमें पीएनबी पुरबालियान, एसबीआई मंसूरपुर, इलाहाबाद बैंक खतौली व भूमि विकास बैंक बुढ़ाना शामिल हैं। ग्रामीणों ने कहा कि सभी बैंकों में लोन दिए जाने के समय संबंधित किसान से पिछले लोन की पूर्ति की एनओसी मांगी जाती है,

लेकिन धनप्रकाश को आखिर कैसे एक ही समय में चार-चार बैंकों द्वारा लोन दे दिया गया। एडीएम प्रशासन ने ग्रामीणों को बताया कि पूरे मामले की वे खुद जांच करेंगे। जांच के दौरान सभी चारों बैंकों से उनके द्वारा दिए गए लोन की पत्रावलियां तलब कर ली गईं हैं, जिनमें किसान धनप्रकाश त्यागी के हस्ताक्षरों का मिलान करने के साथ ही उनमें कहां के और कौन गवाह हैं, इसकी भी गहन जांच की जाएगी। यदि कहीं भी किसी स्तर पर गड़बड़झाला पाया जाता है तो संबंधित बैंक अफसरों व अन्य लोगों को चिह्नित कर उनके खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराकर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

किसान ने धोखे से पी थी कीटनाशक दवा : डीएम
मुजफ्फरनगर। इस मामले में डीएम अजय शंकर पांडेय का कहना है कि मामले की बृहस्पतिवार को ही एसडीएम खतौली से जांच कराई गई थी, जिसमें वृद्ध किसान द्वारा धोखे से गन्ने में डालने वाली कीटनाशक दवा को दवा समझकर पीने की बात सामने आई है। वृद्ध किसान नजले व सांस की बीमारी से भी पीड़ित था। किसान के बेटे राजीव ने अपने बयान में पिता के ऊपर किसी प्रकार का दबाव नहीं होने की भी बात कही है।

डीएम ने बताया कि किसान पर 15.77 लाख रुपये का ऋण खतौनी में अंकित है। करीब डेढ़ साल पहले तकादे की कार्रवाई की गई थी, जिसके बाद तहसील स्तर पर कोई उत्पीड़न की कार्रवाई फिलहाल नहीं की गई है। किसान का बैंक खाता भी अप्रैल-2018 में कुर्क किया गया था, जिस पर उसने बैंक में दूसरा खाता खुलवाकर गन्ने का भुगतान प्राप्त कर लिया था। डीएम ने फर्जी लोन की जांच एलडीएम और सुुसाइड नोट की जांच एडीएम प्रशासन से कराने की भी बात कही है।
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