जानसठ में किसान नेता सरदार वीएम सिंह ने कहा कि जीवनभर किसानों के हकों के लिए लड़ाई लड़ता रहूंगा। किसान सम्मेलन में किसानों के हकों को लेकर पांच सूत्रीय एजेंडे पर भी चर्चा हुई। गन्ना भुगतान के 14 दिन से अधिक विलंब होने पर ब्याज दिए जाने सहित कई मांगों की जोरदार वकालत की गई।
गांव मीरापुर दलपत में सर्वजातीय तिसंग बावना मंच की दसवीं वर्षगांठ पर आयोजित किसान सम्मेलन में राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन के संयोजक सरदार वीएम सिंह ने कहा कि प्रदेश के किसानों को बचाने एवं खेती को जिंदा करने के लिए पांच सूत्रीय कार्यक्रम बनाया गया है, जिसमें न्यूनतम समर्थन मूल्य को लाभकारी बनाना होगा, ताकि जो किसान खेती छोड़ रहे हैं, वह इसकी तरफ वापस मुड़ सकें।
प्रत्येक किसान को केंद्र सरकार द्वारा घोषित एसएमपी मिलना चाहिए। इसकी खरीद के लिए केंद्र और प्रदेश सरकार द्वारा किसी प्रकार का कोटा निर्धारित नहीं किया जाना चाहिए। चीनी मिलों को गन्ने की कटाई और ढुलाई का खर्च वहन करना चाहिए। भुगतान 14 दिन में हो और विलंब से मिलने पर किसानों को इसका ब्याज दिया जाए। बसपा सरकार द्वारा 2010 में बेची गई चीनी मिलों की जांच सीबीआई से कराए जाने, बंद पड़ी मिलों को चालू कराने, किसानों को प्राकृतिक आपदा से हुए नुकसान का मुआवजा दिए जाने आदि पांच सूत्रीय मांगों पर चर्चा हुई, जिसमें उन्होंने कहा एक कमेटी बनाकर सरकार से इन मुद्दों पर बात होगी।
सम्मेलन में किसान नेता गुलाम मोहम्मद जौला, ठाकुर पूरण सिंह, जाट आरक्षण संघर्ष समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष यशपाल मलिक ने भी विचार व्यक्त किए। अध्यक्षता राजसिंह अलीगढ़ और संचालन सिराजुद्दीन और प्रमोद अहलावत ने संयुक्त रूप से किया। राजवीर मुंडेट, मानवेंद्र, उपेंद्र चौधरी, मुकेश प्रधान, जयप्रकाश शास्त्री आदि मौजूद थे। बावना मंच के मंत्री चौधरी उधम सिंह ने सभी का आभार व्यक्त किया।
किसान मजदूर संयुक्त मोर्चा का गठन हुआ
किसान सम्मेलन में कई संगठनों के अध्यक्षों ने मिल कर किसान मजदूर संयुक्त मोर्चा का गठन किया गया. जिसमें सरदार वीएम सिंह को अध्यक्ष और गुलाम मोहम्मद जौला को संरक्षक बनाया गया है। गुलाम मोहम्मद जौला ने बताया कि नए संगठन में उनके संगठन के अलावा भारतीय किसान संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष ठाकुर पूरण सिंह, सर्वजातीय तिसंग बावना मंच को जोडक़र किसान मजदूर संयुक्त मोर्चा का गठन किया गया है, जिसमें तय किया गया है कि सभी नेता अपना संगठन पूर्व की भांति चलाते रहेंगे। किसानों के हितों की लड़ाई के लिए धरना-प्रदर्शन के लिए सभी संगठनों से जुड़े किसान एकत्र होकर पूरी ताकत से लड़ाई लड़ेंगे।