मुजफ्फरनगर। बजट से नौकरीपेशा लोगों को ज्यादातर बिंदुओं पर निराशा ही हाथ लगी है। केवल आयकर स्लैब में बदलाव करने से थोड़ी राहत मिली, लेकिन कर्मचारी संगठनों की मांगों को पूरा करने के लिए बजट में कोई घोषणा नहीं हुई। पुरानी पेंशन, आउटसोर्सिंग एवं संविदा कर्मचारियों को नियमित करने की मांग यूं ही रह गई। सरकारी संस्थानों का निजीकरण नहीं करने को लेकर भी बजट में कोई आश्वासन नहीं दिया गया बल्कि पीपीपी मॉडल पर कई परियोजनाओं को लागू करने की बात कही गई है।
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- कर्मचारी की सबसे बड़ी मांग पुरानी पेंशन की थी। उसे लागू नहीं किया गया। आउटसोर्सिंग बंद की जानी चाहिए थी और अर्धसैनिक बलों को शहीद का दर्जा तथा अन्य सुविधाएं देने की मांग पर भी कोई गौर नहीं किया गया। - राहुल चौधरी, जिलाध्यक्ष, राज्य कर्मचारी महासंघ।
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- बजट में दोहरी टैक्स प्रक्रिया अपनाने की बजाय पूर्व वाली टैक्स स्लैब में ही थोड़ी छूट मिलनी चाहिए थी। जिससे बचत भी होती रहे और लोग खर्च अधिक करें। इससे आर्थिक सुस्ती टूटती। - संजीव जावला, चौधरी छोटूराम इंटर कॉलेज।
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- आयकर को सरल बनाया जाना चाहिए था। कर्मचारी पुरानी पेंशन बहाल नहीं होने, रेलवे के निजीकरण एवं शिक्षा के क्षेत्र में एफडीआई को लेकर सहमत नहीं हैं। बेरोजगारी दूर करने के लिए कदम नहीं उठाए गए हैं। - विकास कुमार, सिंचाई विभाग।
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- कर्मचारियों की जो मांगें थी वे जस की तस रह गईं हैं। बजट में कई कार्य पीपीपी मॉडल पर करने की बात कही गई है। धारा 80-सी में कर्मचारियों को पिछले आठ साल से कोई राहत नहीं दी गई है। - आदर्श चौधरी, कृषि विभाग।