अल्ट्रासाउंड मशीन की जांच करती टीम।
जिले में अल्ट्रासाउंड केंद्रों की जांच के लिए बनी कमेटी सवालों के घेरे में है। कमेटी में सदस्यों पर सवाल उठाते हुए शिकायत की गई है। स्वास्थ्य विभाग मनमाने तरीके से कमेटी चला रहा है, जबकि इसमें नियुक्त डॉक्टर अमान्य हैं। ऐसे में कमेटी द्वारा किए जाने वाले निरीक्षण और छापामारी पर भी संदेह खड़ा हो गया है। ताज्जुब यह है कि लगातार शिकायतें आने के भी जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग कार्रवाई करने में कदम पीछे रखे हुए हैं।
अल्ट्रासाउंड केंद्रों की नियमित जांच-पड़ताल और लिंग परीक्षण की रोकथाम के लिए जिला स्तरीय जांच कमेटी बनी हुई है। कमेटी की कमान डीएम के हाथ में होती है, जबकि इनमें टेक्निकल रूप से आठ चिकित्सकों को सदस्य रखा जाता है। यह दल जनपद में अचानक छापामारी कर अल्ट्रासाउंड केंद्रों की जांच-पड़ताल करते हैं। जनपद में बनी जांच कमेटी सवालों के घेरे में है। स्वास्थ्य विभाग ने अध्यक्ष पद की कमान पूर्व सीएमओ के हाथ में सौंप रखी है, जो डब्ल्यूएचओ द्वारा जिले में स्वास्थ्य विभाग में कार्य कर रहे हैं।
इसके अलावा भी कई शीर्षक पदाधिकरी बनाए हुए हैं। इनमें शहर की महिला चिकित्सक भी हैं। अल्ट्रासाउंड केंद्रों के लिए बनी कमेटी मानक अनुरूप नहीं है। ऐसे में कमेटी के निरीक्षण करने और कार्रवाई पर भी संदेह जताया गया है। पिछले तीन साल से कमेटी की शिकायतों के बाद भी विभाग हीलाहवाली कर रहा है।
इसको लेकर राष्ट्रीय अनुक्षवण एवं निरीक्षण के सदस्य डॉ सुभाष बालियान ने पूर्व डीएम निखिलचंद शुक्ला समेत सीएमओ, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय को शिकायत की। दर्जनभर लैटर सीएमओ कार्यालय को भेजे गए, लेकिन कमेटी पर कोई एक्शन नहीं लिया गया। लिहाजा स्वास्थ्य विभाग मनमाने तरीके से कमेटी को जारी रखे हुए हैं। सीएमओ डॉ पीएस मिश्रा ने बताया कि कमेटी पर कोई विवाद है, इसकी जानकारी नहीं है। विभागीय अधिकारियों से इस बारे में जानकारी ली जाएगी। शिकायत आई है तो उसको भी संज्ञान में लेंगे।
हर माह देनी होती है रिपोर्ट
मुजफ्फरनगर। जांच कमेटी को हर माह सीएमओ को रिपोर्ट देनी होती है, जिसमें कहां-कहां छापामारी की गई है और कितने अल्ट्रासाउंड केंद्र रिपोर्ट दे रहे हैं। कमेटी ने महीने भर क्या किया। मौजूदा कमेटी अल्ट्रासाउंड केंद्रों पर कार्रवाई करने में पीछे है।