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काली माता के मंदिर में पूरी होती है हर मुराद

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काली माता के मंदिर में पूरी होती है हर मुराद
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पुरकाजी। पुरकाजी से करीब दो किलोमीटर दूर लक्सर मार्ग पर गांव सेठपुरा में प्राचीन काली माता मंदिर आस्था का केंद्र बना हुआ है। मान्यता है कि जो भी श्रद्धालु मंदिर में आकर काली माता के चरणों में मन्नत मांगते हैं, वह पूरी होती है।
कस्बा निवासी स्वर्गीय आज्ञाराम छाबड़ा ने 1958 में मंदिर का निर्माण कराया था। कथा है कि काली माता ने स्वपन में मंदिर बनाने की बात कही थी। आज्ञाराम छाबड़ा के निधन के बाद उनके भतीजे संजीव छाबड़ा मंदिर की देखरेख कर रहे हैं।
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मंदिर बेहद पुराना हो जाने पर वर्ष 2018 में रवि खुल्लर द्वारा मंदिर में काली माता की मूर्ति स्थापित कराई गई थी। जिसके उपलक्ष्य में प्रत्येक वर्ष मंदिर पर अप्रैल में एक कार्यक्रम का आयोजित कर हवन यज्ञ व भंडारे का आयोजन किया जाता है। चैत्र मास के नवरात्रों के अलावा शारदीय नवरात्रों सहित अन्य दिनों में भी प्रत्येक मंगलवार और शनिवार को मंदिर पर श्रद्धालुओं की भीड़ रहती है। मंदिर में शिव परिवार के अलावा बजरंगबली और शनिदेव की मूर्तियां भी स्थापित हैं। -
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मंदिर आकर मिलता है सुकून
श्रद्धालु अर्जुन गुप्ता, राजू सोढ़ी, पुनीत चौधरी और भवन सिंह वर्मा ने बताया कि काली माता मंदिर की काफी महत्व है। यहां आकर मन को सुकून मिलता है।
दूर दराज से आते हैं श्रद्धालु
मंदिर पुजारी ब्रज मोहन का कहना है कि पुरकाजी क्षेत्र के अलावा उत्तराखंड और अन्य दूर दराज क्षेत्रों से श्रद्धालु मंदिर में आते रहते हैं। मंदिर की मान्यता है कि जो भी श्रद्धालु मंदिर में आकर माता काली से मन्नत मांगता है। मां उसकी मन्नत पूरी करती है।
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