चरथावल के गांव कुटेसरा से पकड़े गए आतंकी अब्दुल्ला ने मदरसा महमूदिया में 200 रुपये में दाखिला लिया था। मदरसे में खुद को गरीब और मजलूम बताकर मुफ्त में हॉस्टल में रहने और खाने की सुविधा भी हासिल कर ली थी। आठ माह तक अब्दुल्ला के रहने-खाने का खर्च भी मदरसा प्रशासन ने वहन किया। रिकार्ड के मुताबिक पढ़ाई के दौरान आतंकी से कोई परिचित या रिश्तेदार तक मिलने नहीं आया।
एटीएस के हत्थे चढ़े आतंकी अब्दुल्ला ने रिमांड के दौरान कई राज खोले हैं। पासपोर्ट बनाए जाने से लेकर फैजान के साथ काम करने के तरीकों का भी खुलासा किया गया है। दीनी तालीम की आड़ में आतंकी अब्दुल्ला शहर के सरवट में रहा। इस दौरान उसने किन-किन गतिविधियों को अंजाम दिया, इसकी छानबीन चल रही है।
सूत्रों के मुताबिक मदरसे में आतंकी अब्दुल्ला ने खुद को इस तरह से पेश किया था कि वह केवल दीन की जिंदगी गुजारने वाला बनेगा। हदीस के मुताबिक अपने अखलाक (कर्म) रखेगा, लेकिन उसके शातिर दिमाग में क्या चल रहा था। असल में कौन है? इन सब बातों से मदरसा प्रशासन अंजान रहा। सबसे दिलचस्प बात यह रही कि मदरसे में आतंकी अब्दुल्ला ने मौलवियत की पढ़ाई करने के लिए दाखिला लेने में 200 रुपये बतौर फीस के दिए थे।
दाखिले के समय उसने खुद को गरीब और मजलूम बताकर दीनी तालीम हासिल करने की गुजारिश की थी। बाहरी छात्रों के नियमों के अनुसार मदरसे में आतंकी अब्दुल्ला को हॉस्टल में कमरा और खाना मुहैया कराया गया। मदरसे के रिकार्ड के मुताबिक मौलवियत की पढ़ाई के दौरान आतंकी से उसका कोई परिचित, रिश्तेदार या दोस्त कभी मिलने नहीं आया। इसके अलावा भी आतंकी ने मदरसे से कहीं बाहर घूमने और आने-जाने की कोई अनुमति भी नहीं ली। ऐसे में अनुमान है कि आतंकी अब्दुल्ला गोपनीय तरीके से अपने मिशन को अंजाम दिेने में लगा रहता था। पढ़ाई के बाद वह ज्यादातर अपना समय अपने कमरे में ही बिताता था।
जो मिलता उसे शौक से खाता था आतंकी
मुजफ्फरनगर। मदरसे में बाहरी छात्रों की संख्या भी काफी है। बाहरी छात्रों को पढ़ाई के दौरान खाने-पीने के साथ ही बीमारी में इलाज का खर्च मदरसे की ओर से वहन होता है। मदरसे में रोजाना अलग मेन्यू के अनुसार भोजन बनता है। जिसके चलते आतंकी अब्दुल्ला भी मौलवियत की पढ़ाई के दौरान जो भी खाना बनता था, उसे शौक से सहपाठियों के साथ खाता था। अलग से कोई खाने-पीने की ख्वाहिश उसने कभी नहीं की।
इसलिए नहीं जान पाए आतंकी की हकीकत
मुजफ्फरनगर। मदरसे के मोहतमिम कारी नईम ने बताया कि मदरसे में पढ़ने वाले बाहरी छात्रों से तीन साल पहले ही आईडी, घर का मूल निवास आदि लेने का काम शुरू किया गया है। अब्दुल्ला ने केवल अपना पता लिखाया था, उस वक्त आईडी नहीं ली जाती थी, जिस कारण अब्दुल्ला की हकीकत नहीं जान सके। अब मदरसे में दाखिले के दौरान छात्र की आईडी समेत उसके अभिभावकों का भी पता लिया जाता है।
सहारनपुर के वकील पर एटीएस की नजर
मुजफ्फरनगर। अब्दुल्ला का फर्जी पासपोर्ट बनाने का मामला सहारनपुर से जुड़ा है। नौ हजार रुपये लेकर पासपोर्ट बनवाने वाले सहारनपुर के कथित वकील को चिह्नित कर लिया गया है। एटीएस उसके खिलाफ सुबूत जुटा रही है। सुबूत हाथ में आते ही वकील की गिरफ्तारी की जाएगी। गोपनीय तरीके से उस पर नजर रखी जा रही है। पुलिस अधिकारी अब्दुल्ला के पासपोर्ट में रिपोर्ट लगाने वाले पुलिस और एलआईयू कर्मचारियों की भी जांच कर रही है।