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एआरटीओ दफ्तर में नहीं पहुंचे कर्मचारी

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एआरटीओ दफ्तर में पसरा सन्नाटा। - फोटो : MUZAFFARNAGAR
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एआरटीओ दफ्तर में नहीं पहुंचे कर्मचारी
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मुजफ्फरनगर। किसान संगठनों के भारत बंद व चक्का जाम के असर से एआरटीओ दफ्तर पर भी पड़ा। कर्मचारी दफ्तर न पहुंचने के कारण जरूरी काम की विंडो भी रिक्त रहीं, जिससे लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा।
एआरटीओ दफ्तर में अधिकांश कर्मचारी आसपास के जनपद के रहने वाले हैं, जो रोजाना अपने घर से ही आते-जाते हैं। इनमें से कुछ कर्मचारियों को तो महत्वपूर्ण विंडो पर तैनात किया गया है, जिनमें न्यू रजिस्ट्रेशन के साथ ही वाहन ट्रांसफर संबंधी विंडो भी शामिल हैं। गौरतलब है कि एआरटीओ दफ्तर में रोजाना 80 से सौ तक वाहन ट्रांसफर होते हैं, जबकि करीब तीन सौ नए वाहनों का रोज रजिस्ट्रेशन किया जाता है। इसके साथ ही करीब 50 वाहनों के ऐसे पंजीकरण भी होते हैं, जो प्रदेश के अन्य जनपदों से टेंपरेरी रजिस्ट्रेशन लेकर आते हैं। ऐसे में यदि कार्यदिवस पर स्टाफ दफ्तर में उपस्थित न हो तो सैकड़ों लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है। मंगलवार को एआरटीओ दफ्तर में कमोबेश यही हालात दिखाई दिए। दरअसल, किसान संगठनों द्वारा लगाए गए चक्का जाम के चलते बाहर के जनपदों से रोजाना ड्यूटी पर आने-जाने वाले कर्मचारी ड्यूटी पर ही नहीं पहुंच पाए। इनमें महत्वपूर्ण विंडो पर कार्यरत कर्मचारी भी शामिल थे। इसके चलते विभाग में मंगलवार को न्यू रजिस्ट्रेशन के साथ ही वाहन ट्रांसफर विंडो भी खाली पड़ी रही। ऐसे में महत्वपूर्ण कार्यों के लिए दफ्तर पहुंचने वाले सभी लोगों को घंटों परेशान होने के बाद मजबूरीवश बैरंग लौटना पड़ा।
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इन्होंने कहा .......
एआरटीओ विनीत मिश्रा का कहना है कि दफ्तर में कितने कर्मचारी बाहर के जनपद से हैं, जो रोजाना आते-जाते हैं, इस बारे में जानकारी ली जाएगी। यदि मंगलवार को कर्मचारी ड्यूटी से गैर हाजिर रहे हैं, तो उनसे इस संबंध में जवाब तलब किया जाएगा।
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