ककरौली के गांव बेहड़ा सादात की वृद्घ महिला अपना कच्चा मकान दिखाती।
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ककरौली। गांव बेहड़ा सादात की एक बुजुर्ग महिला कच्चे मकान में रहने को मजबूर है। वह एक कपड़े के थैले में कॉस्मेटिक सामान रखकर गांव में ही घर घर जाकर महिलाओं को बेचती है। वृद्ध महिला कच्चे मकान में रहती है। आज तक उसका पक्का मकान नहीं बन सका है। वह कई बार ग्राम प्रधान से भी मिल चुकी है।
गांव बेहड़ा सादात निवासी 80 वर्षीय हनीफा पत्नी स्वर्गीय हसमुद्दीन ने बताया कि वह कई साल से एक छोटे से कच्चे मकान में अकेली रहती है। कुछ साल पहले गंभीर बीमारी के चलते उसके पति की मौत हो गई थी। उसका परिवार में कोई बुढ़ापे का सहारा नहीं है। इतनी उम्र में भी वह एक छोटे से कपड़े के थैले में गांव में ही घर घर जाकर महिलाओं को कॉस्मेटिक का सामान बेचती है। इससे वह दिन भर में लगभग 50 रुपये कमा लेती है। वृद्ध महिला ने बताया कि इतनी महंगाई के चलते इन पैसों में उसका गुजारा नहीं होता है। जिससे वह आस पड़ोस के लोगों से खाने पीने का सामान मांग कर अपना पेट भरती है। उसका कहना है कि वह अपना मकान बनवाने के लिए कई बार ग्राम प्रधान से भी मिली है, लेकिन उसे झूठा आश्वासन देख कर टाल दिया जाता है। मास्टर मोहम्मद अली, शमीम, मोहम्मद अय्यूब, कल्लू, इस्तेकार, रहमत, जाहुल जैदी, आसिफ रजा, शाहिब, उम्मेद, मोहम्मद बाबू आदि लोगों ने जानसठ एसडीम से वृद्धा को आर्थिक सहायता दिलाए जाने की मांग की है।