मुजफ्फरनगर। कृषि विभाग में डेटा फीडिंग की आड़ में बेरोजगारों से ठगी के खेल का खुलासा हुआ। विकास भवन में नौकरी दिलाने का झांसा देकर नाम पर आठ बेरोजगार युवकों से 12 लाख रुपये ठग लिए गए। आरोपी ने पीड़ितों से 26 दिन तक काम भी कराया। इसके बाद नौकरी से निकालने की जानकारी दी। सिविल लाइन थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई गई है। जी इंफ्रा के नाम से कंपनी बताकर पूरे प्रदेश में ठगी करने का आरोप है। कृषि विभाग और पुलिस मामले की जांच में जुटा है।
शाहपुर थाना क्षेत्र के गांव मंधेड़ा निवासी दीपक कुमार ने एसएसपी संजय कुमार वर्मा को शिकायती पत्र देकर बताया कि पांच माह पहले उसकी मुलाकात प्रीति विहार लक्ष्मी नगर पूर्वोत्तर दिल्ली निवासी कपिल कुमार के साथ हुई थी। उसने विकास भवन मुजफ्फरनगर में नौकरी लगवाने का झांसा दिया।
दावा किया कि संविदा कर्मी के तौर पर अर्द्धसरकारी नौकरी लगेगी, इसके लिए डेढ़ लाख रुपये खर्च आएंगे। विश्वास कर पीड़ित ने कुछ रुपये ऑनलाइन व कुछ रुपये नगद दिए।
पीड़ित के अलावा अरुण कुमार, राम गोपाल व खांजापुर बुढ़ाना मोड़ निवासी ललित कुमार, मेरठ के गांव सलावा निवासी शिवम, सुजड़ू निवासी मोहम्मद इरफान, विजय कुमार, चरथावल निवासी प्रदीप कुमार से भी डेढ़-डेढ़ लाख रुपये नौकरी दिलाने के नाम पर रुपये लिए।
आरोप है कि आरोपी ने नियुक्ति पत्र भी दिया, जिसमें 28 हजार रुपये प्रतिमाह लिखा गया। सभी पीड़ितों से विकास भवन में दो अप्रैल 2026 से 28 अप्रैल 2026 तक सरकारी कागजात स्कैनिंग का भी काम कराया। इसके बाद आरोपी युवक विकास भवन से अपने कंप्यूटर व स्कैनिंग मशीन उठाकर ले गया।
अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग आरोप है कि अधिकारियों ने इस धोखाधड़ी के बारे में वार्ता करने पर कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया। सीडीओ कंडारकर कमल किशोर देशभूषण ने बताया कि उन्हें इस तरह की शिकायत नहीं मिली है। पुलिस ने प्राथमिक दर्ज की है, जांच के बाद ही असलियत सामने आएगी।
जिला कृषि अधिकारी राहुल कुमार तेवतिया का कहना है कि उन्हें इस मामले की जानकारी नहीं है। मामले की जांच कराकर आगे की कार्रवाई की जाएगी।