आठ साल की नौकरी की चाह भी अधूरी
मुजफ्फरनगर। मात्र आठ साल के लिए नौकरी की चाह में काउंसिलिंग कराने पहुंचे जाहिद अली की इच्छा इस बार भी अधूरी रह गई। 54 वर्षीय जाहिद अन्य शिक्षामित्रों की तरह 14 साल से शिक्षक बनने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। न केवल जाहिद, बल्कि 74 शिक्षामित्र ढलती उम्र में नियुक्ति की उम्मीद से आए थे, लेकिन सभी फिलहाल निराश लौट गए।
खतौली निवासी जाहिद अली की शिक्षामित्र के रूप में 2006 में नियुक्ति हुई थी। 54 साल की उम्र में उन्हें नियुक्ति मिलती है, तो मात्र आठ साल ही नौकरी कर पाएंगे। उनका कहना है कि जितने दिन भी हो, कम से कम सरकारी शिक्षक तो बन जाएंगे। यह सपना भी पता नहीं कब पूरा होगा। इनके अलावा धौलपुर निवासी राहुल देव, लद्दावाला के नवेद हसन तथा मुजफ्फरनगर के ही नरेंद्र सिंह, ममता, सुनीता, शाहिदा आदि शिक्षामित्र अपने डाक्यूमेंट तैयार करने में लगे थे। इनमें से ज्यादातर की उम्र 45 साल से ऊपर है. जबकि कुछ तो 50 से भी ज्यादा आयु के हैं। इनका कहना है कि लंबे संघर्ष के बाद दो परीक्षाएं पास कर वे शिक्षक भर्ती में शामिल हुए, लेकिन फिर से काउंसिलिंग रोक दी गई। उनकी तो बस एक ही इच्छा है कि उम्र के इस पड़ाव में किसी तरह शिक्षक पद पर नियुक्ति मिल जाए। काउंसिलिंग रुकने से सभी बेहद निराश दिखे। जिले की आवंटन सूची में 74 शिक्षामित्र शामिल हैं। इनमें 34 पुरुष और 40 महिलाएं हैं। जिले व प्रदेश के शिक्षामित्र, शिक्षक बनने के लिए लगातार प्रयास करते रहे। सपा सरकार में उन्हें समायोजित भी किया गया, लेकिन बाद में उनका समायोजन रद्द हो गया। अब शिक्षामित्रों को शिक्षक बनने के लिए पहले टीईटी और फिर शिक्षक भर्ती परीक्षा से गुजरना पड़ा। इनमें जो सफल हुए उन्हें अधिकतम 25 अंकों का वेटेज देते हुए अन्य अभ्यर्थियों के साथ काउंसिलिंग को बुलाया गया था। इनके लिए आयु सीमा की बाध्यता भी नहीं है। बीएसए रामसागर पति त्रिपाठी का कहना है कि फिलहाल काउंसिलिंग रोक दी गई है। आगे शासन से जो निर्देश प्राप्त होंगे उसी के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।