प्रतिमा लगाए जाने की सूचना पर पहुंची पुलिस।
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दो अप्रैल 2018 के दलित आंदोलन के दौरान हुए बवाल में शहर में गोली लगने से मरे अमरेश के गांव गादला में उसकी प्रतिमा लगाने का प्रयास किया गया। सूचना पर पहुंचे अफसरों ने ग्रामीणों व परिजनों से वार्ता कर उन्हें समझाते हुए प्रतिमा को कब्जे में लेकर ग्राम प्रधान की सुपुर्दगी में दे दिया। एहतियातन गांव में पुलिसकर्मी बल तैनात किए गए हैं।
शहर क्षेत्र में एक साल पूर्व दो अप्रैल को दलित आंदोलन के दौरान भड़की हिंसा में भोपा क्षेत्र के गांव गादला निवासी अमरेश पुत्र सुरेश की गोली लगने से मौत हो गई थी। पुलिस ने अमरेश की हत्या में गांव मेघाखेड़ी निवासी रामशरण को गिरफ्तार करते हुए उसके कब्जे से आला-ए-कत्ल बरामद कर उसे जेल भेज दिया था। उधर, अमरेश की आंदोलन में मौत के बाद समाज के लोगों ने उसे कौमी शहीद का दर्जा दिया था।
करीब एक माह पूर्व गांव गादला में बैठक कर दलित संगठनों ने गांव के संत रविदास मंदिर में अमरेश की प्रतिमा लगाने का भी निर्णय लिया था। इसके तहत प्रतिमा तैयार कराकर अमरेश के परिजनों के सुपुर्द कर दी गई थी, जिसे दो अप्रैल 2019 (आज) मंदिर में स्थापित किया जाना था। सोमवार को पुलिस-प्रशासन को अमरेश की प्रतिमा स्थापित किए जाने की भनक लगी तो हड़कंप मच गया। आनन-फानन में सीओ भोपा राममोहन शर्मा व इंस्पेक्टर एमएस गिल टीम के साथ गांव में पहुंचे और अमरेश के परिजनों व ग्रामीणों से वार्ता कर चुनाव आचार संहिता का हवाला दिया।
इसके बाद प्रतिमा को अमरेश के घर से कब्जे में लेकर ग्राम प्रधान अशोक कुमार की सुपुर्दगी में दे दिया गया। मामले में अमरेश के पिता सुरेश कुमार का कहना है कि उन्होंने एसडीएम से प्रतिमा स्थापित करने के लिए अनुमति मांगी थी, जिसका पत्र भी एसडीएम के यहां दिया हुआ है। हालांकि फिलहाल उन्हें इसकी अनुमति नहीं मिल पाई थी। वहीं, सीओ राममोहन शर्मा का कहना है कि आचार संहिता के चलते किसी भी तरह की प्रतिमा स्थापित नहीं की जा सकती, जिसके चलते अमरेश की प्रतिमा को ग्राम प्रधान के सुपुर्द कर दिया गया है।