असमंजस में कर्मचारी, कैसे निभाएं जिम्मेदारी
मुजफ्फरनगर। लेखपालों के स्थान पर अन्य विभागों के कर्मचारियों की ड्यूटी लगाने को लेकर विभागों में असमंजस का माहौल रहा। कर्मचारियों ने लेखपाल ड्यूटी से हाथ खींचने शुरू कर दिए हैं। साथ ही कर्मचारी संगठनों ने भी प्रशासन के इस आदेश का विरोध करते हुए कहा कि कोई अन्य कर्मचारी लेखपाल का काम नहीं कर सकता है। इस संबंध में प्रशासनिक अधिकारियों से मिलकर वार्ता की जाएगी।
जिले में लेखपालों की हड़ताल के चलते प्रशासन ने उनके स्थान पर अन्य विभागों के 5200 ग्रेड पे वाले 498 लिपिकों की ड्यूटी लगा दी है। विकास विभाग, शिक्षा विभाग, कृषि, सिंचाई, सेवायोजन समेत अन्य करीब 52 विभागों के लिपिकों को लेखपाल के कार्यों की जिम्मेदारी दी गई है। ड्यूटी के आदेश मिलने के बाद कर्मचारियों में असमंजस का माहौल है। मंगलवार को विभागों के कर्मचारी अपने ही कार्यालयों में रहे, लेकिन इस बात की चर्चा करते रहे कि एक-दो दिन में उन्हें संबंधित क्षेत्रों में जाना होगा। कर्मचारी सबसे ज्यादा परेशान इस बात से हो रहे हैं कि वे लेखपालों का काम कैसे करेंगे। फिलहाल उन्हें संबंधित तहसीलों पर पहुंचने के लिए कहा गया है। यहां योगदान करने के बाद वे संबंधित गांवों में जाएंगे।
राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के अध्यक्ष रविंद्र नागर का कहना है कि लेखपाल का कार्य अन्य विभागों के कर्मचारी नहीं कर सकते हैं। अन्य विभागों के कर्मचारी आय, जाति एवं सामान्य निवास प्रमाण पत्रों पर रिपोर्ट नहीं लगा सकते हैं। उन्हें लॉग इन आईडी भी जारी भी कर दी जाएंगी तो भी लेखपाल का कार्य करना अन्य किसी के बस की बात नहीं है। इस संबंध में प्रशासनिक अधिकारियों से मिलकर वार्ता की जाएगी। उन्हें कर्मचारियों की समस्या से अवगत कराया जाएगा। उधर, महामंत्री कुलदीप शर्मा ने बताया कि सिंचाई विभाग के कर्मचारियों ने लिखित में अवगत करा दिया है कि वे लेखपालों का कार्य नहीं कर सकते हैं। यदि वे लेखपाल की जगह काम करेंगे तो उनके अपने विभागों के कार्य भी प्रभावित हो जाएंगे।
लेखपालों का समर्थन कर रहे कर्मचारी संगठन
मुजफ्फरनगर। कर्मचारी संगठन लेखपालों के आंदोलन का समर्थन कर रहे हैं। ऐसे में वे उनके स्थान पर ड्यूटी कैसे कर सकते हैं। राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के महामंत्री कुलदीप शर्मा का कहना है कि परिषद ने लेखपाल संघ को समर्थन दे रखा है। महासंघ के पदाधिकारी भी लेखपालों के आंदोलन को समर्थन की बात कह रहे हैं। शासन-प्रशासन को लेखपालों की मांगों को पूरा करना चाहिए।