शुकतीर्थ में भागवत कथा का शुभारंभ करते स्वामी ओमानंद जी महाराज।
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सत्य का बौद्ध कराना परमार्थ का कार्य
मोरना। भागवत पीठ अधिष्ठाता स्वामी ओमानंद महाराज ने कहा कि भागवत अमृत कथा, सुधा अमृत, तथा गंगा जलरूपी त्रिवेणी संगम है। किसी को आध्यात्म का ज्ञान देकर सत्य का बौद्ध करा देना बहुत बड़ा परमार्थ का कार्य है।
शुकतीर्थ में स्थित डोगरे कथा भवन में छत्तीसगढ़ से आए काफी संख्या में श्रद्धालुओं के बीच स्वामी ओमानंद महाराज ने आचार्य अचल शास्त्री, सुमन शास्त्री आदि के साथ ब्रह्मचारियों, पुरोहित के उच्च स्वर में किए गए वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच दीप प्रज्वलित कर भागवत कथा का शुभारंभ किया। कथा व्यास आचार्य मोनू महाराज को पटका पहनाकर शास्त्र भेंटकर सम्मानित किया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ से आए श्रद्धालुओं द्वारा भागवत जन्म भूमि पर भागवत कथा के रूप एक सराहनीय स्तुति, अनुकरणीय कार्य में भागदार बन पुण्य के भागी बनने का सुनहरा अवसर प्राप्त हो रहा है। भागवत दिव्य ज्ञान प्रदान करती है, भागवत संस्कृति है साधना है। भागवत भारतीय संस्कृति का इतिहास और दर्पण है। जीवन और मृत्यु का बोध कराती है। मानव को भक्ति के मूल का ज्ञान कराते हुए भाग्य के द्वार खोलने का सरल सुलभ साधन है। भागवत कथा के आयोजन में पुरुषोत्तम शर्मा, देव निरंजन परिवार मुख्य भूमिका निभा रहा है।