मुजफ्फरनगर। जिला योजना वर्ष 2018-19 के अनुमोदन के लिए जिला पंचायत सभागार में बजट पर चर्चा हुई। बीते वर्ष केवल 92 करोड़ की धनराशि ही जिला योजना में मिल पाई थी, जबकि बजट 279 करोड़ का था। वर्ष 2018-19 का कुल परिव्यय 291.06 करोड़ का है, जिसके सापेक्ष विभागों से 304.62 करोड़ के प्रस्ताव प्राप्त हुए।
जिला पंचायत के सभागार में अध्यक्ष आंचल तोमर की अध्यक्षता में बैठक हुई। डीएम राजीव शर्मा ने बताया कि वर्ष 2017-18 में 279.52 करोड़ के परिव्यय के सापेक्ष 92 करोड़ की धनराशि जिला योजना के अंतर्गत मिली थी। आगामी वित्त वर्ष के लिए गन्ना विभाग ने 16.27 करोड़ रुपये का प्रस्ताव उन्नतशील गन्ना बीज उत्पादन, वितरण कार्यक्रम आदि के लिए प्रस्ताव दिया है।
पशु पालन विभाग द्वारा पशु चिकित्सा एवं स्वास्थ्य तथा रोग निदान सेवाओं के सुधार एवं विस्तार के लिए 3.32 करोड़ के प्रस्ताव दिए गए। दुग्ध विकास विभाग ने 2.61 करोड़ के प्रस्ताव दिए। आंचल तोमर ने बताया कि वन विभाग द्वारा शहरी क्षेत्रों में सामाजिक वानिकी तथा सामाजिक वानिकी कार्यक्रमों के लिए 1.12 करोड़ रुपये की धनराशि के प्रस्ताव दिए गए।
इसके साथ ही ग्राम विकास (मनरेगा), इंदिरा आवास, प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत 70.40 करोड़ के प्रस्ताव प्रस्तुत किए गए। निजी लघु सिंचाई योजना के 3.65 करोड़ रुपये के प्रस्ताव प्रस्तुत किए गए। नेडा विभाग के 1.07 करोड़ के प्रस्ताव सम्मिलित किए गए।
आंचल तोमर ने बताया कि सड़क एवं पुल के निर्माण के अंतर्गत ग्रामीण मार्गों का पुनर्निर्माण और नवीन ग्रामीण सड़कों के निर्माण के लिए 75 करोड़ के प्रस्ताव शामिल किए गए। इसके अतिरिक्त प्राथमिक शिक्षा में जिले में मिड-डे मिल योजना तथा सर्वशिक्षा अभियान के अंतर्गत शिक्षामित्रों को मानदेय संबंधी 6.62 करोड़ के प्रस्ताव भी सम्मलित किए गए। माध्यमिक शिक्षा के अंतर्गत व्यवसायिक शिक्षा के विषय विशेषज्ञ को मानदेय और राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा के अभियान के 5.97 करोड़ के प्रस्ताव सम्मलित किए गए।
इसी प्रकार चिकित्सा विभाग के एलोपैथिक, होम्योपैथिक तथा आयुर्वेद के अंतर्गत प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों का निर्माण, सामुदायिक स्वास्थ्य भवनों का निर्माण, वर्तमान प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के नवीनीकरण, विस्तारण एवं बिजली, पानी की व्यवस्था आदि के लिए 38.10 करोड़ रुपये के प्रस्ताव जिला योजना में सम्मिलित किए गए।
इसके अतिरिक्त पेयजल ग्रामीण के 16.16 करोड़ और पेयजल शहरी योजना के अंतर्गत 1.10 करोड़ रुपये के प्रस्ताव जिला योजना में सम्मिलित किए गए।
समाज कल्याण, दिव्यांगजन, अल्पसंख्यक एवं पिछड़ा वर्ग के 17.80 करोड़ के प्रस्ताव सम्मलित हुए। इसके अतिरिक्त कुछ विभाग के एक करोड़ से कम धनराशि के प्रस्ताव भी जिला योजना में प्रस्तुत किए गए, जिन सभी पर सदन ने अपने स्वीकृति प्रदान की। सीडीओ अर्चना वर्मा, डीडीओ मोतीलाल व्यास, सीएमओ पीएस मिश्रा, एएमए नूतन सहित अन्य सभी विभागों के अधिकारीगण उपस्थित रहे।
सदन के नियमों का नहीं हो रहा पालन
जिला पंचायत सदस्य शुएब अहमद, रूबी, दीप्ति पाल, अनीता, कौसर जहां, यूसुफ ने आरोप लगाया कि जिला पंचायत की बैठकों में सदन के नियमों का पालन नहीं हो रहा है। सत्ताधारी सांसद के इशारे पर अधिकारी दबाव में काम कर रहे हैं। कोरम पूरा हुए बिना ही प्रस्ताव पास किए जा रहे हैं। तीन फरवरी की बैठक में भी कोरम पूरा नहीं था और दस मार्च की बैठक में भी यही स्थिति थी।