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किसानों को छेड़ा नहीं, नेताओ को छोड़ा नहीं

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किसानों को छेड़ा नहीं, नेताओं को छोड़ा नहीं
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मुजफ्फरनगर। केंद्र और प्रदेश सरकार सीधे किसानों से नाराजगी नहीं लेना चाहती है। भारत बंद में जाम लगाने के दौरान किसानों के प्रति प्रशासन का रवैया नरम रहा। राजनीतिक दलों के नेता सीधे निशाने पर रहे। सुबह के समय ही रालोद नेताओं को घर में ही नजरबंद कर दिया गया। जाम लगाने की कोशिश करने वाले रालोद, सपा और कांग्रेस के नेताओं को गिरफ्तार कर लिया गया। भाकियू ने जिले में 12 से अधिक स्थानों पर जाम लगाया, लेकिन पुलिस ने एक स्थान पर भी जबरदस्ती की कोशिश नहीं की।
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भारत बंद को लेकर जिला प्रशासन सुबह से ही सतर्क रहा। प्रशासन का यह पूरा प्रयास था कि बाजारों को जबरन बंद न होने दिया जाए। इसमें प्रशासन पूरी तरह सफल रहा। शहरी क्षेत्रों में बंद का असर नहीं रहा। चक्का जाम को लेकर भी प्रशासन ने यह रणनीति बनाई थी कि कहीं पर भी जाम न लगे। इसी के चलते सुबह के समय ही रालोद के जिलाध्यक्ष अजीत राठी, जिला पंचायत सदस्य संजय राठी, अभिषेक चौधरी को घर में ही नजरबंद कर दिया गया। सपा और कांग्रेस के भी कुछ नेताओं को गिरफ्तार कर लिया गया। सुबह 11 बजे तक जब कहीं भी जाम नहीं लगा तो प्रशासन की योजना सफल होती दिखाई दी, लेकिन भाकियू की रणनीति ने प्रशासन की योजना को फेल कर दिया। भाकियू कार्यकर्ताओं ने एक साथ ही जिले में 12 से अधिक स्थानों पर जाम लगा दिया। सबसे पहले दिल्ली-देहरादून हाईवे पर भाकियू नेता राजू अहलावत ने जाम लगाया। इसके बाद भाकियू ने शाहपुर, छपार, रोहाना, भोपा, मोरना, जानसठ, पुरकाजी, रतनपुरी आदि स्थानों पर जाम लगा दिया। प्रशासन ने जाम लगाने वाले राजनीतिक लोगों पर तो सीधे कार्रवाई कर दी, लेकिन भाकियू कार्यकर्ताओं को छेड़ा तक नहीं। जागाहेडी में रालोद के युवा जिलाध्यक्ष विदित मलिक, सुधीर भारतीय आदि को गिरफ्तार कर जाम खुलवा दिया गया। लालूखेडी में भी यहीं हुआ। इसी तरह बुढ़ाना में पूर्व मंत्री योगराज सिंह और पूर्व विधायक राजपाल बालियान को हिरासत में ले लिया गया। अहिल्याबाई चौक पर कांग्रेस कार्यकर्ता और प्रकाश चौक पर क्रांति सेना के कार्यकर्ता गिरफ्तार किए गए। प्रशासन ने एक भी स्थान पर किसी किसान संगठन के कार्यकर्ता को कुछ नहीं कहा। तीन बजे समय पूरा होने पर भाकियू नेताओं ने खुद ही जाम खोल दिया। प्रशासन और सरकार की सीधी सोच रही कि किसानों को छेड़कर दिल्ली में बैठे आंदोलनरत किसानों को मुद्दा न दें। भाकियू सुप्रीमो चौधरी नरेश टिकैत ने तो शाहपुर में साफ शब्दों में कहा भी कि प्रशासन हमें छेड़ता तो परिणाम घातक होते।
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