सेना भर्ती में दौड़ लगाते युवक।
- फोटो : अमर उजाला
सेना में भर्ती के लिए शैक्षिक योग्यता भले ही हाईस्कूल या इंटर पास हों, लेकिन अच्छे पढ़े-लिखे युवा भी दौड़ में शामिल हैं। देशसेवा का जुनून गांव के छोरों के सिर चढ़कर बोल रहा है। युवा आर्मी में जाने के लिए दो-दो साल से तैयारी कर रहे हैं। इसके लिए सोने से लेकर खाने-पीने में सावधानी के साथ दिनचर्या बदली है।
बुलंदशहर के गांव स्याना निवासी संदीप गुर्जर लखावटी कालेज से एग्रीकल्चर से बीएससी कर रहा है। सेना में भर्ती होने का बचपन से ख्वाब संजोए हुए हैं। इसके लिए मां-बाप के साथ गांव के बड़े बुजुर्गों का आशीर्वाद लेकर भर्ती में शामिल होने आया है। आर्मी के जरिए देशसेवा पहली च्वाइस है।
बुलंदशहर के शिकारपुर का रहने वाला जितेंद्र बीए पास है। कई जगह नौकरी तलाशी, लेकिन अंत में परिजनों की कोशिश से आर्मी की तैयारियों में जुट गया। इसके लिए एक साल से तैयारी में लगा है। उम्मीद जताई कि सफलता मिलेगी। स्याना का कपिल शर्मा बुलंदशहर कालेज से बीसीए कर चुका है। लेकिन, कालेज के समय से ही सेना में जाने के लिए तैयारी कर रहा है। रोजाना पांच किमी दौड़ लगाता है। खाना-पीना भी बदल दिया।
प्राइवेट नौकरी नहीं करनी है, देश के लिए सेना का चुनाव किया। शिकारपुर का रहने वाला प्रशांत चौहान बॉयो टेक्नोलॉजी से बीएससी कर रहा है। सेना की नौकरी को सबसे पसंदीदा मानता है। जिसके लिए दो साल से अपने दोस्तों के साथ मिलकर तैयारी कर रहा है। कहता है कि देश सेवा के साथ आर्मी इंसान को स्वाभिमानी बना देती है, अन्य नौकरी में ऐसा नहीं है।