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दस साल बाद लौटी बेटी, रिश्तेदारों ने अपनाने से कर दिया इंकार

Mon, 25 Dec 2017 12:21 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर
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पुलिस के साथ अपने घर पहुंची प्रभा। - फोटो : अमर उजाला
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दस साल बाद एक बेटी अपने शहर लौटी, मगर रिश्तेदारों ने अपनाने से इंकार कर दिया। बदनसीब प्रभा गुप्ता अपनों के शोषण और बेरुखी की सजा भुगत रही है। आगरा से उसे लेकर आई पुलिस जब उसके घर पहुंची, तो पता चला कि पिता का मकान बेच कर चाचा चंडीगढ़ में शिफ्ट हो गया है। प्रभा का आरोप है कि माता-पिता की मौत के बाद प्रापर्टी के लालच में चाचा ने उसे मानसिक रोगी बनाने की दवाईयां दी।
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शहर में बेटी प्रभा गुप्ता अपनों को ढूंढ़ रही है। दस साल पहले उसके चाचा ने उसे आगरा के मानसिक स्वास्थ्य संस्थान एवं चिकित्सालय में भर्ती कराया था। लंबे इलाज के बाद जब उसकी मनो स्थिति ठीक हुई तो उसने अपने अतीत की यादों को समेटना शुरू किया। प्रभा ने अपने चाचा-चाची और दूसरे रिश्तेदारों से मिलने की इच्छा जताई। डॉक्टरों के परामर्श और पुलिस अफसरों की वार्ता के बाद आगरा पुलिस उसे लेकर मुजफ्फरनगर पहुंची।

शहर कोतवाली में आगरा से आए एचसीपी विनोद कुमार और महिला कांस्टेबल रुक्मणि ने अपनी आमद कराई। प्रभा गुप्ता को लेकर पुलिस रामलीला टिल्ला मोहल्ले में पहुंची। आसपास में दस साल बाद लौटी प्रभा को कोई पहचान नहीं सका। उसने बताया कि वह स्वर्गीय दिनेश गुप्ता और सविता की बेटी है। अपने मकान को देख कर खुश हुई प्रभा को जब पता चला कि चाचा पवन गुप्ता ने पैतृक मकान बेच दिया है, वह मायूस हो गई। आंखों में आंसू छलक आए।
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निराश और बोझिल मन से प्रभा ने पुलिस को अपनी बुआ पूनम अग्रवाल के घर चलने की मंशा जाहिर की। आगरा पुलिस इस बेटी को लेकर नई मंडी स्थित बुआ के घर पहुंची, मगर यहां भी प्रभा को आसरा नहीं मिला। बुआ ने हाथ जोड़ कर कह दिया कि वह अपनी भतीजी को साथ रखने में असमर्थ है। प्रभा कभी पुलिस को देखे और कभी अपने रिश्तेदारों को। दुखी मन से वह बुआ के घर से लौटने लगी, मगर उसके कदम उठने की ताकत खो चुके थे।

साथ आई महिला कांस्टेबल रुक्मिणी ने प्रभा को पानी पिलाया और हौसला रखने की हिम्मत दी। अपनी की बेरुखी से ममार्हत प्रभा गुप्ता ने कहा कि अब तो भगवान ही उसका मालिक है। जब अपनों ने ही सहारा देने से इंकार कर दिया, ऐसे में वह क्या कर सकती है। प्रभा ने बताया कि बचपन में ही उसकी मां सविता की मौत हो गई थी। बाद में पिता दिनेश गुप्ता भी चल बसे।

चाचा-चाची ने पालन पोषण किया, लेकिन कक्षा पांच के बाद उसकी पढ़ाई छुड़वा कर चौका बर्तन में लगा दिया। आरोप लगाया कि पैतृक संपत्ति के लालच में चाचा ने उसे मनोरोगी बनाने के लिए दवाईयां देने लगी,  जिसकी वजह से उसकी मानसिक हालत बिगड़ती गई। बाद में उसे आगरा के मानसिक चिकित्सालय में भर्ती करा दिया।

प्रभा लौट गई आगरा
मुजफ्फरनगर। अपनों का कोई सहारा न मिलने पर अभागी प्रभा गुप्ता आगरा लौट गई। साथ आए एचसीपी विनोद कुमार ने बताया कि पीड़िता का मकान बिक चुका है। नाते रिश्तेदार साथ रखने को तैयार नहीं है। पूरी स्थिति की जानकारी एसएसपी आगरा और मानसिक चिकित्सालय के प्रशासन को दी जाएगी।
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