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दारुल उलूम ने प्रशासन की अपील को ठुकराया, नहीं घोषित होगा अवकाश

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देवबंद (सहारनपुर)। नागरिकता कानून को लेकर कई राज्यों में फैली विरोध की आग से देवबंद को बचाने के लिए अधिकारियों के दारुल उलूम प्रबंधतंत्र से 15 दिन का अवकाश घोषित करने की अपील पर मदरसा संचालकों की बैठक हुई। इसमें दारुल उलूम ने तत्काल प्रभाव से अवकाश घोषित न करने का निर्णय लिया। साथ ही संस्था की सुप्रीम पावर मजलिस-ए-शूरा पर ये फैसला छोड़ा है।
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नागरिकता संशोधन कानून को लेकर विरोध प्रदर्शनों और हिंसा को देखते हुए एएमयू अलीगढ़ और जामिया मिल्लिया इस्लामिया में छुट्टी घोषित करने के बाद अब जनपद में भी प्रशासन ने जरूरी कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। प्रशासन की मंशा है कि इस्लामी तालीम के सबसे बड़े मरकज दारुल उलूम समेत सभी छोटे बड़े दीनी इदारों 5 जनवरी तक छुट्टी कर दी जाएं, ताकि इनके छात्र किसी भी तरह के विरोध प्रदर्शन का हिस्सा न बन सकें। इसी को लेकर मंगलवार को कमिश्नर संजय कुमार, डीआईजी उपेंद्र अग्रवाल, डीएम आलोक कुमार और एसएसपी दिनेश कुमार ने देवबंद पहुंचकर डाक बंगले में दारुल उलूम के मोहतमिम मौलाना मुफ्ती अबुल कासिम नौमानी व अन्य मदरसों के जिम्मेदारों के साथ बैठक की। इसमें उन्होंने संचालकों से संस्थाओं में 15 दिन का अवकाश घोषित करने का आग्रह किया। इसके बाद दारुल उलूम ने इस संबंध में मशविरा कर शाम तक अवगत करा देने का भरोसा प्रशासन को दिलाया। शाम में दारुल उलूम में हुई जिम्मेदारों की बैठक में अवकाश घोषित करने न करने पर विचार हुआ। इसके बाद निर्णय लिया गया कि इस संबंध में मजलिस-ए-शूरा के सदस्य ही फैसला लेंगे। मोहतमिम मुफ्ती अबुल कासिम नौमानी ने कहा शूरा सदस्यों को इससे अवगत कराया जाएगा। पांच दिन में शूरा की बैठक बुलाकर इस पर निर्णय लिया जाएगा। शूरा सदस्य ही इस पर अंतिम मुहर लगाएंगे।
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